women-journalist

साजिश: महिला पत्रकार को मारनें की हो रही है लगातार कोशिश

186

~पुलिस की कार्य प्रणाली संदेह के घेरे में…

~सरकार बदली तो बंधी आस…

Shabab Khan

शबाब ख़ान

अमेठी: गुंडाराज मुक्त समाज बनाने का प्रण लेकर सत्ता में आयी योगी सरकार से अब दिन प्रतिदिन आम लोगों की उम्मीदें बढ़ती ही जा रही है। इसी क्रम में अब एक महिला पत्रकार ने भी यूपी पुलिस की कार्रवाई से आहत होकर अपनी बात योगी सरकार से साामने रखने का फैसला किया है।

दहेज और पैसे से संबधित इस मामले पर पीड़ित म​हिला पत्रकार की कोई पुलिस अधिकारी न तो सुन रहा है और न ही मदद को आगे आ रहा है। अब इस म​हिला पत्रकार की उम्मीदें प्रदेश की योगी सरकार से बंध गयी है।
न्याय और जान की सलामती के लिए यह महिला पत्रकार पुलिस प्रशासन के एक छोर से दूसरे छोर तक अपनी व अपने बेटे की जान की सलामती के लिए चक्कर काट रही है लेकिन महकमा अपने पुराने ढर्रे पर चलता हुआ मामले को टालने में लगा है। अब इस दौरान पीड़ित महिला पत्रकार के साथ यदि कोई अनहोनी हुई तो प्रशासन को जवाब देना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि महिला लगभग सभी पुलिस अधिकारियों के यहां अपनी समस्या को लेकर दस्तक दे चुकी हैं।
Meenakshi letter

Janmanchnews.com

क्या है पत्रकार मिनाक्षी मिश्रा का मामला…
अमेठी जिले के बारामासी क्षेत्र में अपने इकलौते पुत्र अक्षज के साथ अपने ससुराल के मकान में अकेले रहने वाली मिनाक्षी मिश्रा का विवाह अमित मिश्रा से वर्ष 2004 में हिंदु रीति रिवाज से संपन्न हुआ था। विवाह के बाद मिनाक्षी अपने पति के पैतृिक आवास मोगा, पंजाब में जाकर रहने लगी।

नवविवाहित मिनाक्षी के हाथ से अभी मेहंदी भी नहीं छुठी थी कि उनको दहेज के लिए सास-ननदों ने तरह-तरह से शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। कभी किसी बहाने तो कभी किसी बहाने उन्हें दहेज की उलाहना देने लगे। इस क्रम में पत्रकार के पति अमित मिश्रा भी धीरे-धीरे अपनी मां-बहनों का साथ देने लगे और पीड़ित महिला पर ससुराल वालों का अत्याचार दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगा।

इस बीच परिवार के मुखिया यानि मिनाक्षी के ससुर को घर में चल रहा यह सब नागवार लगने लगा तो उन्होंने मिनाक्षी के पक्ष में उसके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया, उन्होंने मोगा स्थित एक प्लॉट का बैनामा अपनी बहू के नाम परिवार के लाख विरोध के बावजूद कर दिया। यहीं से मिनाक्षी अब अपने पति और उनकी बहनों की आंखों की किरकिरी बन गई।

40 करोड़ का है मामला…

ससुर द्वारा मिनाक्षी को तकरीबन 50 लाख की प्रापर्टी दी गई। मगर बात यह है कि मिनाक्षी और अमित मिश्रा का एक इकलौती संतान है। जो पूरी प्रापर्टी का इकलौता वारिस है। पीड़ित महिला पत्रकार के मुताबिक उनके ससुर की पूरी प्रापर्टी तकरीबन 40 करोड़ की है। जिसके कारण ससुराल वाले अब अन्य तरीकों से उन्हें और उनके बच्चे को मारने की सााजिश रच रहे हैं।

साजिश का ऐसे हुआ पर्दाफाश…

पीड़ित म​हिला पत्रकार मिनाक्षी का आरोप है कि उन्हें और उनके पुत्र को मारने की साजिश रची जा रही है। वो भी एक धीमी जहर के माध्यम से, दरअसल अपने व अपने मासूम बेटे की गिरते स्वास्थ्य से मिनाक्षी परेशान थी। तभी एक ऐसी घटना घटी जिसने सुशिक्षित पत्रकार को जड़ से हिला दिया। मिनाक्षी नें अपने घरेलू कामधाम के लिए एक लड़के को घर पर रखा था, एक दिन जब मिनाक्षी की मां उससे मिलने घर आयीं तो उसी लड़के से उन्होंने बाजार से समोसे मंगाये।
 मां-बेटी ने अभी समोसे खाये ही थे कि उन दोनों की हालत बिगड़ने लगी। शक होने पर जब उस लड़के की तलाशी ली तो उसके जेब से सुर्ती के पैकेट में छिपायी गई पुड़िया में पाउडर मिला, पूछे जाने पर लड़के ने बताया कि वो पाउडर उसे एक व्यक्ति ने दिया था। साथ ही कहा था कि यह पाऊडर उसकी महिला और बच्चे के खाने पीने की चीजों में थोड़ा-थोड़ा मिला दिया करें, जिसके बदले नौकर को अच्छी-खासी रकम भी दी गयी।

मामला थाने पहुंचा लेकिन आरोप है कि मामले को पुलिस ने किसी नेता के दबाव में आकर दबा दिया। यहां तक कि बरामद जहर की पुड़िया भी पुलिस ने गायब कर दिया। नियमत: पुलिस को मिनाक्षी का मेडिकल परिक्षण कराना चाहिए था लेकिन पुलिस ने इसकी शायद जरूरत ही नहीं समझी, क्योंकि कार्रवाई न करने का दबाव था। वही मीनाक्षी ने एक प्राइवेट पैथालॉजी में अपनी पूरी बॉडी का चेकअप कराया जिसमे किडनी पर असर, लीवर पर असर, हाई ब्लड प्रेशर की परेशानी सामने आयी। इधर पुलिस नें हिरासत में लिए गये नौकर को भी छोड़ दिया। मां-बेटी ने बहुत दौड़-भाग किया लेकिन कोई फरियाद सुनने को तैयार नहीं हुआ।

ननद है डॉक्टर…

पीड़ित महिला पत्रकार के मुताबिक ससुराल वाले उन्हें सीधे तौर पर तो नहीं मार सकते, इसलिए उन्हें और उनके बच्चे को मारने के लिए स्लो पॉयजन देकर धीरे-धीरे मारना चाहते हैं ताकि किसी को शक ना हो और सबको लगे की बिमारी के कारण मर गई। पीड़िता द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि इस प्लान में मुख्य भुमिका मिनाक्षी की नंनद हैं जो एक डॉक्टर हैं।

पीड़िता का कहना है कि आखिर एक डाक्टर ही तो बता सकता है उन उपलब्ध केमिकलस के बारे में जो इंसान के नर्वस सिस्टम पर आहिस्ता-आहिस्ता असर करता है। बता दें कि अब मिनाक्षी के व उसके 10 साल के बेटे अक्षज की नाक से कभी खून निकलना, हफ्तों तक सिरदर्द रहना, शरीर में ऐठन होना और पूरे शरीर पर काले निशान अचानक उभर आना ये सब खाना खाने के बाद हो जाता है।
खाने में है जहर…

मिनाक्षी जिस इलाके में रहती हैं वहां गिनती के स्टोर्स हैं। आश्चर्य होता है यह जानकर और समझने पर कि महिला किसी नई दुकान से जब कोई खाद्य सामाग्री की खरीदारी करती हैं तो पहले दो दिन सब ठीक रहता है। उसके बाद शुरू होता है साजिशों का खेल। दुकानदार उसे अलग से रखे गए सामान को उसे पकड़ाता है। यह भी महिला पत्रकार का आरोप है। यहां तक कि पैकेट बंद सामानों के इस्तेमाल के बाद भी पीड़ित मां-बेटे की हालत बिगड़ जाती है।

मीनाक्षी कहती है कि क्या आपने कभी ऐसे शैम्पु का प्रयोग किया है जिसके इस्तेमाल के बाद आपके शरीर पर, चेहरे पर छाले निकल आये हो? साथ ही आपको तेज पेट दर्द के साथ पूरा शरीर काला पड़ गया हो? आपकी आँखे कमजोर लगने लगी हों? साथ ही उनमे मिर्ची जैसी तेज जलन महसूस हो? इन सब के बाद अब वह खाने-पीने का सामान 40 किमी दूर से लाती हैं। इस क्रम में भी कई बार जान लेने की कोशिश की गई। मिनाक्षी बताती हैं कि दो बार उसके दोपहिया वाहन को पीछे से टक्कर मारी गई। वह सड़क पर गिरी, लेकिन इससे पहले कि वह कुछ समझ पाती टक्कर मारने वाला गायब हो चुका था।

प्रशासन के रवैये से परेशान हो चुकी हैं महिला पत्रकार

अपने आप को न्याय दिलाने के लिए मिनाक्षी ने लगातार पुलिसवालों के दरवाजे खटखटा रही हैं। लेकिन प्रशासन उनकी बात को अनसुनी कर रहा है। एक अकेली महिला दर-दर भटक रही हैं, कभी एसपी साहब के दरबार में हाजिरी लगाती हैं तो कभी सीओ को अर्जी देती हैं। कभी कोतवाली इंस्पेक्टर साहब को समझाने की कोशिश करती हैं कि कैसे पैसों की लालच में फंसे आसपास के दुकानदार भी ननद की कारगुजारी में मदद कर रहें हैं।

Meenakshi File FIR

Janmanchnews.com

पत्रकार ने पुलिस के सामने उठाए सवाल

जब एक पत्रकार ने खुद अमेठी कोतवाली से संपर्क कर महिला पत्रकार की एफआईआर दर्ज करने की बात कही तो कोतवाली इंस्पेक्टर साहब ज्ञान देने में लग गये कि ‘सीलबंद खाद्य सामाग्री में मिलावट कैसे संभव है?’ तो आपको बता दें कि पुलिस और जनता सब जानते हैं कि ट्रेनों में जहरखुरानी करने वाले गिरोह केले और दूध के बंद पैकेट में जहर मिलाकर यात्री को कैसे लूट चुके हैं।
सेब के बीज को सुखाकर उसका पाऊडर बनाया जाता है, उसमे धतूरे का बीज मिला कर पानी में मिक्स करिए, एक महीन वाली सिरींज में भरिए और केले में इंजेक्शन लगा दीजिए, दूध के पॉली पैक में भी इंजेक्शन के माध्यम से जहर मिलाया जा सकता है। जहां छेद हुआ है वहां बस एक बूंद मोमबत्ती से गर्म मोम टपका दें, लीजिए सील पैक मगर जहरीला दूध हाजिर है। इस तरह के बहुत से केमिकल फार्मूला है जिसे यदि इंसानी शरीर में थोड़ा-थोड़ा पहुंचाया जाये तो इंसान का नर्वस सिस्टम हमेशा के लिए डाउन हो जाता है। अब यहां सवाल यह नहीं है ये रैकेट कैसे काम करता है, पुलिस द्वारा इस तरह के सवाल बचकाना सा महसूस होता है।

पुलिस का यह कहना

इस प्रकरण पर पुलिस का कहना है यह सब महिला पत्रकार का वहम है कि उन्हें कोई जान से मारना चाहता है। तो यदि यह सब वहम है तो नौकर के पास से पकड़ा गया पाउडर प्रशासन नें कहां गायब कर दिया? जिस नौकर पर 504, 307, 120B के तहत कार्रवाई होनी चाहिए थी उसे छोड़ क्यों दिया? महिला का मेडिकल मुआयना क्यों नहीं हुआ? ऐसे बहुत से सवाल हैं जो प्रशासन पर सवालियां निशान खड़े करते हैं।

तलाक देने का बना रहे हैं दवाब

मिनाक्षी का आरोप है कि उनकी ननदें चाहती है कि अमित से उनका तलाक करवा कर उनकी दूसरी शादी कराएगीं। वहीं अब खुद अमित कहते हैं कि उनके पीछे कोई लड़की पड़ी है जिससे उन्हें शादी करनी पड़ेगी वरना तथाकथित लड़की उन्हें कहीं का नहीं छोड़ेगी। क्यों? क्या किया है अमित मिश्रा नें उस तथाकथित लड़की के साथ कि वह अपनी कानूनन वैध पत्नी मिनाक्षी मिश्रा से यह जिक्र कर रहे हैं? यहां पर मिनाक्षी के पति के चरित्र पर उंगली उठना लाजमी हैं। मिनाक्षी का कहना है कि उनके पति कहते हैं कि मुझे तलाक दे दो वरना मैं बर्बाद हो जाउंगा। हालांकि मिनाक्षी ने अपने पति को किसी भी कीमत पर तलाक देने से मना कर दिया है, क्योंकि मिनाक्षी जानती है कि वजह उसके नाम ससुर द्वारा की गई संपत्ति है। इससे खिजलाए पति, सास और ननद तब से मिनाक्षी की जान लेने की कोशिश में लगे हैं।

कोर्ट दे चुका है फैसला

बता दें कि पंजाब के मोगा स्थित ससुराल में जब मिनाक्षी का रहना मुश्किल हो गया तो वह अपने बेटे को लेकर अमेठी चली आई थी। जहां बारामासी क्षेत्र में उसके ससुर का एक भवन है जिसमें आजकल वह रहती हैं। यहां आकर मिनाक्षी ने ससुराल वालों पर डीवी एक्ट के तहत मुकदमा कर दिया और अतत: कोर्ट ने फैसला मिनाक्षी मिश्रा के पक्ष में देते हुए पति अमित मिश्रा को आदेश दिया कि वह अपनी पत्नी मिनाक्षी मिश्रा और उसके पुत्र को एक लाख रुपए का मासिक अंतरिम गुजारा-भत्ता दें। कोर्ट के इस फैसले के बाद जो पति मिनाक्षी से दूर भागता था, वह स्वयं माफी मांगकर मिनाक्षी के साथ अमेठी में रहने लगा। लेकिन इसमें कितनी गहरी चाल है यह मिनाक्षी को अब धीरे-धीरे मालूम चलना शुरू हो गया।

मदद को आगे आया आईरा

पुलिस प्रशासन से निराश पत्रकार ने जब भारत पर में फैले अठ्ठारह हजार पत्रकारों के मंच ऑल इंडिया रिपोर्टर्स एसोसिएशन (आईरा) से संपर्क किया और अपनी आपबीती सुनाई तो पदाधिकारियों के होश उड़ गए। एसोसिएशन ने एकमत से फैसला लिया कि अमेठी पत्रकार मिनाक्षी मिश्रा को हर कीमत पर इंसाफ दिलाया जाएगा।

इस संदर्भ में उत्तरप्रदेश पुलिस महानिरीक्षक जावीद अहमद से मिलकर टाल-मटोल करने वाले अमेठी पुलिस अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई के लिए ज्ञापन सौपने का फैसला लिया गया। इसी क्रम में आईरा का एक पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल जल्दी ही अमेठी का दौर करेगा।

हर डेस्क पर पहुंचा है मिनाक्षी का फाइल

पुलिस प्रशासन के उपर से नीचे तक लगभग हर दफ्तर में मिनाक्षी की लिखित शिकायत ठंडे बस्ते में पड़ी है। अपनी तहरीर में मिनाक्षी ने अपने पति अमित मिश्रा, नंनद डा० उर्मिला शुक्ला व पूनम तिवारी को नामजद किया है, क्या नियम नहीं है कि पहले पुलिस एफआईआर दर्ज करें, फिर नामजद लोगों को बुलाकर पूछताछ करें।

पुलिस का कर्तव्य है कि ‘वहम’ की बांसुरी छोड़कर पूरे मामले की गहनता से जांच करें, जिसमें फोरेंसिक टीम की भी मदद ली जाए? जिन दुकानदारों पर महिला आरोप लगा रही है, क्या पुलिस नें उनसे पूछताछ किया? क्या पुलिस को मिनाक्षी के पति से यह नहीं पूछना चाहिए कि वह क्यों अपनी पत्नी पर उसके ससुर द्वारा दी गई संपत्ति को खुद के नाम कराने का दबाव बना रहे हैं? और सबसे बड़ी बात क्या नौकर को हिरासत में लेकर पुलिस को पूछताछ नहीं करना चाहिए? ऐसे बहुत से सवालिया निशान हैं जिन पर यदि पुलिस पूरी ईमानदारी से काम करें तो महिला के इर्द-गिर्द बुने जा रहे इस षडयंत्र का राज का फाश होने में देर नहीं लगेगी।

shabab@janmanchnews.com