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यूपी में चढ़ा भगवा रंग, योगी की होगी ताजपोशी

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Meenakshi Mishra

मीनाक्षी मिश्र

लखनऊ। विदित हो कि विधानसभा चुनाव में बीजेपी प्रचंड बहुमत से शासन सत्ता की ओर अग्रसर हुई। भाजपा ने सभी सीटों पर हिंदुओं को टिकट देकर अपना मक़सद स्पष्ट कर दिया था कि भाजपा आने वाले समय में हिंदुत्व को ही अपना चेहरा बनायेगी।

ऐसे में तमाम अटकलों के बावजूद बीजेपी ने कट्टर हिंदुत्व को सिर मौर बनाने की ठानी।

गौरतलब है कि बीजेपी वर्तमान यूपी विधानसभा चुनाव को आगामी लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारी के तौर पर ले रही है। ऐसे में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिलने के पश्चात करो या मरो वाली स्थिति बनी हुई है। अभी यूपी ने भाजपा को अपने सभी वादे पूरे करने के लिये स्पष्ट जनादेश दिया है। ऐसे में यदि भाजपा एक भी चूक करती है तो उसके लिये आगामी विधानसभा चुनाव में अत्यंत महंगा पड़ सकता है।

वहीं भाजपा खेमे द्वारा योगी आदित्य नाथ (अजय सिंह) के रूप में लिया गया सशक्त फैसला भजपा को एक सशक्त सरकार देने में मददगार दिखाई दे रहा है। हिन्दू युवाओं का चेहरा रहे योगी आदित्य नाथ की छवि कट्टर हिन्दू के तौर पर जानी जाती है। उन्हें महंत योगी आदित्यनाथ के तौर पर जाना जाता है। हमेशा से लव जिहाद, गौ हत्या, बूचड़खाने बन्द हो। राम मंदिर जैसे अनेक हिन्दू वादी अहम मुद्दों को लेकर चर्चा में रहने वाले योगी आदित्य नाथ मुख्यमंत्री की कुर्सी सँभालने के पश्चात इन मुद्दों को कितना तरजीह देते हैं यह जानना दिलचश्प होगा।

विदित हो कि सपा सरकार में कानून ब्यवस्था का बद से बदतर होता हालात एक अहम मुद्दा रहा है। ऐसे में योगी आदित्य नाथ जैसे सशक्त मुख्यमंत्री से जनता की अपेक्षाएं सौ गुना बढ़ी हुई हैं। युवाओं के साथ साथ महिलाओं को भी कानून ब्यवस्था की बेहतरी को लेकर उम्मीदें बढ़ गयी हैं।

गौरतलब हो कि मीडिया में चल रही अनेक नामों की सुगबुगाहट के पश्चात योगी आदित्य नाथ को बीजेपी विधायक दल की बैठक में नेता चुन लिया गया।  5 जून, 1972 को उत्तराखंड के गढ़वाल में राजपूत बिष्ट परिवार में पैदा हुए योगी आदित्य नाथ का पहले नाम अजय सिंह विष्ट था लेकिन नाथ संपद्राय में दीक्षित होने और सन्यास लेने के बाद उनका नाम योगी आदित्यनाथ हो गया।

गढ़वाल विश्वविद्याल से विज्ञान में स्नातक करने वाले महंत योगी आदित्यनाथ वर्तमान में गारेखपुर लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी का सांसद होने के साथ नाथ संपद्राय की गोरखपुर में स्थित सबसे बड़ी पीठ और मठ गोरखनाथ मंदिर के गोरक्षपीठाधीश्वर महंत हैं।

नाथ संप्रदाय की सबसे कठिन परंपरा हठयोग में दीक्षित और हठयोग स्वरूप एवं साधन, राजयोग- स्वरूप और साधना नामक किताब लिखने वाले योगी 22 साल की उम्र में 15 फरवरी 1994 को गोरखनाथ मंदिर के महंत और सांसद अवैधनाथ ने अपना उत्तराधिकारी चुना था। इसके चार साल महंत अवैधनाथ से जब राजनीति से सन्यास लिया तो उन्होंने अपने उत्तराधिकारी के रूप में गोरखुपर लोकसभा की सीट योगी आदित्यनाथ के हवाले की।

मात्र 26 साल की उम्र में 12वीं लोकसभा के चुनाव साल 1998 में योगी आदित्यनाथ पहली बार गारेखपुर लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी के टिकट पर सांसद बने। इसके बाद लगातार 13वीं, 14वीं, 15वीं और 16वीं लोकसभा के चुनाव में गोरखुपर से सांसद चुने गए।

महंत योगी आदित्यनाथ हिन्दु युवा वाहिनी नामक एक संगठन के संरक्षक हैं जिसका पूर्वांचल के गांवों से लेकर शहरों तक में बड़ा जनाधार है। इसके अलावा आदित्यनाथ विश्व हिन्दू महासंघ नामक एक अंतराष्ट्रीय संस्था के अध्यक्ष हैं। इसके अलावा दर्जनों शैक्षिक और सामाजिक संस्थाओं के अध्यक्ष भी हैं। गोरखुपर में गोरखनाथ क्षेत्र में एक बड़ा चिकित्सालय भी वह चलाते हैं। अमेरिका, मलेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर, कम्बोडिया और नेपाल की यात्रा कर चुके योगी नाथ परंपरा के सबसे बड़े संत हैं।

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