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योगी राज में अमेठी पुलिस की कारगुजारी वादी की जुबानी

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पीड़ित के अनुसार जब वह स्वयं को बेगुनाह साबित करने के लिये विवेचक के पास पहुंचा तो विवेचक ने कहा कि विपक्षी ने चार्ज शीट लगाने के 3000 रूपये दिये हैं अतः तुम 4000 रूपये दे दो तो विवेचना तुम्हारे पक्ष में हो जायेगी…

Meenakshi Mishra

मीनाक्षी मिश्रा

जनपद अमेठी। एक ओर भाजपा ने सत्ता में आने से पूर्व कानून व्यवस्था को लेकर बड़े बड़े वादे किए थें। वहीं सत्ता में आने के पश्चात योगी सरकार में सर्वाधिक मटियामेट कानून व्यवस्था को लेकर ही होता दिखाई पड़ रहा है।

एक ओर सरकार पुलिस मित्र की बात करती है वहीं अमेठी पुलिस ने जनता को याचक बना कर रख दिया है। आये दिन पुलिसिया तंत्र से त्रस्त आम जन मानस फरियाद लेकर कभी योगी के पास तो कभी मुख्य सचिव के पास दौड़ भाग करते नजर आते हैं। क्योंकि निचले स्तर इंसाफ की कोई गुंजाइश नजर नही आती।

ताजा मामला ग्राम अमिया, थाना व तहसील गौरीगंज, जनपद अमेठी का है। जहां के निवासी राम अवधेश सिंह पुत्र स्व. लखन बहादुर का है। जिन्होंने अपने पुत्रों को फर्जी तरीके से मुकदमें में फंसाने का आरोप विपक्षियों के साथ मिलकर पुलिस पर मढ़ा है। पीड़ित के अनुसार रंजिश के चलते वैभव सिंह सुत रमाकांत सिंह ने तत्कालीन समय में थाना गौरीगंज में कार्यरत एस आई राम नारायन यादव जो कि वर्तमान समय में थाना अमेठी में तैनात है, के साथ मिलकर प्रार्थी के ऊपर फर्जी तरीके से मुकदमा कायम कर चार्जशीट लगा दी। जबकि पीड़ित का बयान तक नही लिया गया।

पीड़ित ने पुलिस की कारगुजारी पर गंभीर प्रश्न खड़ा करते हुए कहा है कि उसके ऊपर विपक्षी ने झूठी घटना तालाब की भूमि पर जबरन गेहूं बोकर कटवाना दिखाकर प्रार्थी के तीन पुत्रों रण विजय, दिग्विजय व कप्तान के ऊपर एफ आई आर दर्ज करवाई। जबकि तालाब की भूमि पर बोया गेंहूँ स्वयं विपक्षी ने कटवाया था।

पीड़ित के अनुसार जब वह स्वयं को बेगुनाह साबित करने के लिये विवेचक के पास पहुंचा तो विवेचक ने कहा कि विपक्षी ने चार्ज शीट लगाने के 3000 रूपये दिये हैं अतः तुम 4000 रूपये दे दो तो विवेचना तुम्हारे पक्ष में हो जायेगी।

पीड़ित द्वारा गरीब परिवार से होने के कारण पैसे देने में असमर्थता जाहिर की गयी। जिस पर पीड़ित के अनुसार विवेचक द्वारा फर्जी चार्जशीट लगाकर सुल्तानपुर भेज दिया गया। वहीं पीड़ित योगी राज में न्याय के लिये दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर है।