BREAKING NEWS
Search
Women police

खत्म होता महिला थाने का औचित्य!

323
Share this news...
Meenakshi Mishra

मीनाक्षी मिश्रा

जनपद अमेठी। महिला उत्पीड़न जनपद में ही नही वरन प्रदेश में हमेशा से ही एक गंभीर समस्या रही है। पिछली सरकार की सर्वाधिक किरकिरी महिला उत्पीड़न को लेकर ही हुई थी।

और हालात यहाँ तक पहुँच गये थे महिलाओं ने अपनी सुरक्षा व बेहतरी के लिये बीजेपी को ही चुना। व बीजेपी के पक्ष में जमकर वोट पड़ा।

नतीजतन केंद्र की तर्ज पर प्रदेश में भी बीजेपी की सरकार गठित हो गयी। और कानून व्यवस्था को लेकर लोगों की उम्मीद भी दोगुनी हो गयी।

वैसे महिला को उत्पीड़न से बचाने के लिए यूपीए की सरकार के वक्त महिला थाना की नींव रखी गयी। उम्मीद यह थी कि जो महिलाएं पुरुष थाने में शोषण का शिकार होती हैं। उन्हें निष्पक्ष रूप से न्याय मिलेगा। किन्तु क्या यह सही है कि एक महिला बिना किसी लाग लपेट के या निष्पक्ष रूप से महिला के लिये न्याय करेगी।

यह एक बड़ा प्रश्न है। बात करते हैं जनपद में स्थित महिला थानों की जहाँ पर अधिकतर महिलाएं बद्तर हालात में न्याय की आस लिये थाने के इर्द गिर्द चक्कर लगाती नजर आती हैं। वही महिला सालों साल न्याय की आस में भटकते हुए अंदर व बाहर से पूरी तरह बिखर जाती है।

वैसे तो मीडिया व पुलिस का गहरा नाता है। साथ ही मीडिया की पैनी नजर पुलिस के दरवज्जे पर बनी ही रहती है। किन्तु बात करें महिला थाने की तो यहाँ का क्षेत्र ज्यादातर पुरुष मीडिया कर्मियों से महरूम ही नजर आता है। जिसके चलते महिला थानों में न्याय मिल पाना दूर की कौड़ी साबित हो रहा है।

वही जनपद अमेठी में योगी सरकार के आने के पश्चात ताबड़ तोड़ तबादले होते नजर आये। किन्तु बात करे महिला थानों की तो वहाँ की स्थिति जस की तस बनी हुई है। इस ओर न किसी मीडिया कर्मी की निगाह जाती है और न ही अधिकारी इस ओर किसी प्रकार का संज्ञान लेना उचित समझते हैं। एक ही स्थान पर लंबे वक्त से जमी महिला पुलिस कर्मी किस प्रकार से न्याय संगत होकर महिलाओं को न्याय दिलाएगी यह एक बड़ा प्रश्न है।

[email protected]

Share this news...