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बाढ़ का जायजा ले रहे थें डीएम व एसपी, बाढ़ पीड़ित ने कहा कि ‘हर साल अधिकारी आते और चले जाते हैं’

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संजय मिश्रा,

बहराइच। हर बार अधिकारी आते हैं। डायरी में नोट करवाते है और चले जाते हैं। फिर सब भूल जाते हैं। जहाँ तक सड़क अभी बची है वहाँ तक ही आते है अभी तक राहत सामग्री भी कुछ नही मिली है।

इस समय हम लोगो को सामग्री की जरूरत है लेकिन कुछ नही। जब यहाँ अधिकारी आते है तो बांध तक ही रह जाते है हम लोगों तक आते ही नही है। बांध तक ही बड़े अधिकारी आते है और वहीं से हमारा नाम काट देते हैं। इस समय यहाँ मेरा घर बना है इस समय नही जांच करने आ रहे है।

आज कल में कब कट जाए मेरा घर ये नही पता। बाद में कहते है मिल जाएगा। ये सारी बातें महसी इलाके के गोलागंज गांव निवासी बाढ़ पीड़ित तब कह रहे थे जब कुछ ही दूरी पर डीएम बांध पर बाढ़ का जायजा ले रहे थे। 

तराई में वर्षा थम गई है। लेकिन नेपाल के पहाड़ों पर रुक-रुक कर बादल बरस रहे हैं। जिसके चलते घाघरा नदी के जलस्तर में उतार चढ़ाव चल रहा है। महसी तहसील क्षेत्र के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। गुरूवार को डीएम अजयदीप सिंह व एसपी सुनील सक्सेना बाढ़ क्षेत्र का जायजा लेने पहुचें।

गोलागंज गांव में पीड़ितों से मिल ही रहे थे कि तभी बंसत लाल नाम के ग्रामीण ने तेज आवाज में कहा कि यहाँ हर साल अधिकारी आते है और घूम कर चले जाते है लेकिन कोई समस्या का समाधान नही करते है। मीडिया के कैमरों के सामने अपनी बाते रखते रखते बंसत लाल के आंखों में आंसू आ गया। बंसतलाल के दुख दर्द को जब बाढ़ का जायजा ले रहे डीएम से मीडिया ने अवगत कराया तो डीएम ने कहा कि इस बार मै हू और इनकी सहायता जरूर होगी। पिछली बार क्या हुआ उसके बारे में कुछ नही कहूँगा। जिससे अब बंसतलाल को सहायता की उम्मीद बंध गई।

मार्ग पर चल रहा पानी

कायमपुर- बेलहा बेहरौली तटबंध सम्पर्क मार्ग पर पानी चल रहा। यहाँ पर प्रशासन के दावे है कि ग्रामीणों को नावे दिलाई गई है लेकिन यंहा पर ग्रामीण स्वयं अपने जान को जोखिम में डालते हुए पुल को पार करते हुए नजर आते है।

कर रहे लोग पलायन

महसी क्षेत्र के गोलागंज, प्रधानपुरवा व जर्मापुर गांव का मंजर दिल दहला देने वाला है। यहां के लोग अपनी गाढ़ी मेहनत की कमाई से बनवाए गए मकानों को खुद अपने ही हाथों से तोड़ रहे हैं। इनके शरीर से पसीना निकलने के बजाए आंखों से आंसुओं की बरसात हो रही है। कभी एक-एक पाई जोड़कर पक्का मकान बनवाया था। जिसे उन्हें अपने ही हाथों उजाड़ना पड़ रहा है। यह कटान पीड़ित अपने बच्चों के अंधकारमय होते भविष्य को देखकर बेहद चिंतित हैं।

बर्बाद हो रहीं खरीफ की फसलें 

घाघरा के जलस्तर स्थिर होने से निचले इलाकों में पानी भरा हुआ है। खड़ी फसलें जलमग्न हैं। जिससे ग्रामीणों के चेहरे मुरझा गये हैं। गोलागंज, कायमपुर, पिपरी, कोरिनपुरवा, नगेशरपुरवा में बाढ़ का पानी रुक जाने से धान, मक्का, गन्ना व मेंथा आदि फसलें नष्ट हो रही हैं।

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