Bahraich

मां ने घायल पीड़ित को ठेले पर पंहुचाया अस्पताल, न काम आया डायल 100 और न एम्बुलेंस सेवा

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घयाल युवक ३ से 4 घंटे तक पीड़ा झेलता रहा देर रात मिडिया के हस्तछेप के बाद युवक का इलाज शुरु हो सका…

डायल 100 और एम्बुलेंस सेवा पर लगातार कोशिश की गई… कोई जबाव नहीं मिला!

संजय मिश्रा,

बहराइच। सूबे के मुखिया आदित्यनाथ योगी भले ही अधिकारीयों को इंसानियत का पाठ पढ़ाते हों लेकिन आज भी जमीनी हकीकत कुछ और ही है या ये भी कहना गलत नहीं की जमीनी हकीकत में सिस्टम उसी रूप में कार्य कर रहा है। जिस रूप में पिछली सरकारों में कार्य करती थी।

इसका बड़ा सबूत बहराइच में देखने को मिला जहाँ एक माँ अपने घायल बेटे को एम्बुलेंस और डायल 100 की गाड़ी नहीं मिलने पर मजबूरन जिंदगी बचाने के लिए ठेले से लेकर अस्पताल के लिए निकल पड़ी। लेकिन हैरानी की बात तब देखी गयी। जब अस्पताल कर्मी भी महिला को बिना इलाज इस लिए बैरंग थाने के लिए वापस कर दिए।

क्योंकि वो पुलिस केस था। डॉक्टरों ने आखिर ये क्यों नहीं सोचा की अस्पताल से 1 घंटे की दूरी पर बने कोतवाली ले जाते समय घायल युवक की मौत भी हो सकती थी। इस बड़ी घटना के बाद जिले का कोई भी आला अधिकारी कैमरे के सामने कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।

दरअसल मामला जनपद बहराइच के कोतवाली देहात इलाके का है। जहाँ देर रात 2 पक्षों में मारपीट होने के बाद एक पक्ष से गंभीर रूप से घायल हुए युवक को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों ने पहले डायल 100 और एम्बुलेंस सेवा को फोन किया। लेकिन 3 घंटे बीतने के बाद भी कोई सरकारी सेवा नहीं पहुँचता देख परिजनों ने मजबूरन घायल को ठेले से अस्पताल पहुंचने का प्रयास किया।

अस्पताल ले जाने के बाद घायल को पुलिस केस बताकर फिर ठेले से ही थाने भेजा गया अस्पताल और थाने के चक्कर में घयाल युवक ३ से 4 घंटे तक पीड़ा झेलता रहा देर रात मिडिया के हस्तछेप के बाद युवक का इलाज शुरु हो सका।

इस मामले पर जब जिले के अधिकारीयों से बात करने की कोशिश की गयी तो अधिकारी मिडिया से बचते हुए पल्ला झाड़ते रहे। बहरहाल, इस तरह की घटनाओ के बाद भी शासन प्रशासन संभलने को तैयार नहीं हैं।

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