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गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस, चिकनगुनिया और डेंगू से लड़ेंगी गंबूसिया, 210 तालाबों में छोड़ने की तैयारी

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Priyesh Shukla

प्रियेश शुक्ला

गोरखपुर। गोरखपुर में इन्सेफेलाइटिस का कहर जारी है। हर साल सैकड़ों मासूम बीमारी के कारण जान गवां देते हैं। 31 अगस्त को 16 बच्चों ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ दिया। प्रशासन की कड़ी मेहनत के बावजूद भी इसपर रोक लगाना मुश्किल साबित हो रहा है, लेकिन गोरक्षऩाथ मंदिर में इस बीमारी का तोड़ निकला है।

दरअसल, इस मंदिर के भीमताल की मछलियों से अब इंसेफेलाटिस की बिमारी को रोका जा सकेगा।भीम ताल में गम्बूसिया मछली इंसेफेलाइटिस जैसी बिमारियों से लड़ेगी। इस मछली को मंडल के करीब 210 तालाबों में डालने की तैयारी स्वास्थ्य और मंदिर प्रबंधन कर रहा है।

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अगर इन मछलियों को तालाबों में समय रहते डाल दिया गया तो मच्छरों के लार्वा का सफाया हो सकेगा और मच्छर जनित इंसेफेलाइटिस पर रोक लग सकेगी। जानकारी के मुताबिक, गोरक्षनाथ मंदिर परिसर में स्थित प्रसिद्ध भीमताल में गम्बूसिया मछली डाली गई है। इसका पूरा खाका स्वास्थय विभाग व मंदिर प्रबंधन ने तैयार किया था।गम्बूसिया मछलियां मच्छरों के लार्वा को खा जाती हैं, जिससे मच्छर पनपने के पहले ही खत्म हो जाते हैं।

इन मछलियों को नाले और तालाब में डालने के लिए भीमताल से 43 हजार मछलियां निकाली गई हैं, जो मंडल के करीब 210 तालाबों में डाली जाएंगी।ये मछलियां इंसेफेंलाइटिस के साथ-साथ चिकनगुनिया और डेंगू को रोकने में भी मदद करेगी। मंडल के सबसे ज्यादा प्रभावित जिले कुशीनगर के 72 तालाब चिन्हित किए गए हैं, जबकि महराजगंज के 64 तालाब, देवरिया के 53 व गोरखपुर के 21 तालाब चिन्हित किए गए हैं।

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इन तालाबों का कुल क्षेत्रफल करीब 144 एकड़ है। स्वास्थय विभाग व गोरक्षऩाथ मंदिर के प्रबंधन में चल रही यह तैयारी मुफ्त की जा रही है, जबकि बीते साल इन मछलियों को मंगाने में पैसा व समय दोनों बर्बाद हुआ था। इस पूरी प्रक्रिया में आधी मछलियां रास्तें में ही मर गईं थीं।