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मंत्री जी के क्षेत्र से बह रही है विकास की उल्टी गंगा…

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विकास के जिस ढींढोरे को बीजेपी चुनाव भर पीटती रही आज वो ढोल  फट गयी है। असलियत सब सामने है…

प्रियेश शुक्ला

गोरखपुर। उ.प्र. सरकार में तीन तीन मन्त्रालयों को सम्भालने वाले राज्य मंत्री जय प्रकाश निषाद का विधान सभा क्षेत्र रुद्रपुर सरकार बनने के बाद भी विकास का रोना रो रहा है। भाजपा “सबका साथ,सबका विकास” के  जिस मुद्दे को लेकर चुनाव लड़ी थी। आज वो मुद्दे धरातल से गायब हो गये हैं।

आज वही हाल जय प्रकाश निषाद के मंत्री बनने के बाद रुद्रपुर विधान सभा के आम लोगों का हो गया है। जनता विकास के नाम पर अपने आप को ठगा महसूस कर रही है। विकास के जिस ढींढोरे को बीजेपी चुनाव भर पीटती रही आज वो ढोल  फट गयी है। असलियत सब सामने है।


मंत्री जी बैठक और कार्यक्रम में व्यस्त है और जनता विकास की राह देख रही है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सड़को को गढढा मुक्त करने का वादा जनता से किया है। लेकिन मंत्री जी के क्षेत्र की सड़कों की पहचान गड्ढे ही है। आम आदमी का चलना दुभर हो गया है। कूड़ों का ढ़ेर सड़कों के किनारे गुलदस्ते की तरह रखा गया है जिसमें से जहरीली बदबू आती रहती है।

क्षेत्र का बस स्टेशन भी अपने बदहाली का रोना रो रहा है। हल्की बारिस भी स्टेशन को तालाब बना देती है। स्टेशन के अंदर सुविधाओं का टोटा है। धूप और बारिस में पेड़ ही सहारा है। शौचालय और पेशाब के लिये दिवाल और नालियों का ही सहारा है। माहिलाओं के लिये कोई भी सुविधा नही है। स्टेशन में कोई कर्मचारी मौके पर नही मिलता। परिवहन के नाम पर डग्गा मार वाहनों का भरमार है।

बांध और तटबंध अति सम्वेदनशील है। पुराने मरम्मतों के भरोसे ही टिके है। आखिर मंत्री जी विकास की कौन सी कहानी लिखना चाहते हैं। जो अभी चुप्पी साधे बैठे हैं। क्या विकास के मुद्दे चुनाव जीतने के हथकंडे मात्र ही थे, विकास से मोह भंग हो गया है?

कुछ सूत्रों का कहना है की मंत्री जी जाति विशेष की राजनीति में ही उलझे हुए हैं। अब क्षेत्र की जनता और विकास से कोई सरोकार नहीं है। लखनऊ की गलियां और मंत्री की कुर्सी ज्यादे पसंद है। आखिर तीन मन्त्रलयों की जिम्मेदारी विकास करने के लिये थोड़ें ही मिली है। सबका साथ और अपना विकास भी जरुरी है। मंत्री जी ये पब्लिक है सब जानती है।