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बगावत ने बदली रुद्रपुर की चुनावी फ़िज़ा, भाजपा हो न जाये पवेलियन से बाहर

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— दर्जनों सभासदों ने लौटाया भाजपा का सिम्बल

Priyesh Shukla

प्रियेश शुक्ला

रुद्रपुर। वोटर पशोपेश में है। नामांकन के बाद बागियों की बग़ावत खुलल्लम खुला सामने आ गयी है। अपनी-अपनी पार्टियों से नाराज चल रहे प्रत्याशियों ने पार्टी के विरोध में नामांकन कर चुनावी जंग लड़ने की ताल ठोक दी है। वैसे बागियों की मान मनोवल भी पार्टियों द्वारा किया जा रहा है। पर किसी भी बागी को मनाने में को सफल नही हो सका है।

रुद्रपुर में चुनावी बयार ने अपना अचानक रुख ही बदल लिया है। बागियों की बगावत सबसे ज्यादा बीजेपी खेमे में देखी जा सकती है। जहां पांच-पांच भाजपा से टिकट के दावेदारों ने टिकट कटते ही पार्टी के ही खिलाफ चुनावी ताल ठोक रही है। भाजपा से नगर पंचायत रुद्रपुर के अध्यक्ष पद के लिए प्रमुख दावेदारों में दर्जनों नाम शुमार थे।

लेकिन दावेदारों में प्रबल दावेदारी सुधा निगम पत्नी छठ्ठे लाल निवर्तमान चेयरमैन,विनीता त्रिपाठी पत्नी मन्मथ त्रिपाठी, प्रभावती देवी पत्नी राम भरोसा त्रिपाठी, प्रियंका ओझा पत्नी सुधांशूमौली व बीना गुप्ता पत्नी ई सुशील गुप्ता ने टिकट की मांग की थी। राजनीतिक समीकरण और दांव पेंच के चलते पार्टी ने ब्राह्मण चेहरे पर अपना दांव लगाते हुए रुद्रपुर के चेयरमैन पद के लिए मनोरमा देवी पत्नी मोहन उपाध्याय को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया।

प्रत्याशी के घोषणा होते ही बाकी दावेदारों ने अपनी उपेक्षा होते ही बगावत का रास्ता अपना लिया।और आज आलम यह है कि पाँच प्रत्याशियों की बगावत झेल रही भाजपा पूरी तरह बैकफुट पर आ गयी है। जिसका असर नामांकन के ही दिन दिखना शुरू हो गया। भाजपा के घोषित प्रत्याशी मनोरमा देवी के नामांकन में कोई भी बड़ा पदाधिकारी या नेता शामिल नही हुआ। स्थानीय नेता और भाजपा संगठन के लोग भी नामांकन से दूरी बनाए रहे।

पार्टी सूत्रों के हिसाब से पार्टी के अंदर सबकुछ ठीक नही चल रहा है। भाजपा बगावत से जूझ रही है और बागी भाजपा का खेल बिगाड़ने में लग गए है। भाजपा को सबसे ज्यादा नुकसान सुधा निगम के चुनाव लड़ने से हो सकता है। क्योंकि सुधा निगम भाजपा के ही सहयोगी दल भारतीय समाज पार्टी से लड़ रही है। और भाजपा के कद्दावर कार्यकर्ता व निवर्तमान चेयरमैन छठ्ठे लाल निगम की पत्नी है।

वहीं सतासी स्टेट से ताल्लुक रखने वाली भावना सिह भी भाजपा के टिकट की दावेदार थी। लेकिन पार्टी से बगावत कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सिम्बल पर चुनाव लड़ रही है। बागी प्रत्याशियों में एक नाम बीना गुप्ता पत्नी ई सुशील गुप्ता का भी है। जो शिव सेना के धनुष के साथ चुनावी मैदान में कूद पड़ी हैं।

जब कि सुशील भाजपा के नगर अध्यक्ष रह चुके है। बागी हुई विनीता त्रिपाठी पत्नी मन्मथ त्रिपाठी भी भाजपा का खेल बिगाड़ने में कोई कोर कसर नही छोड़ेगी।रही बात प्रियंका ओझा पत्नी सुधांशूमौली ओझा भी खिलाफत का बिगुल बजा रही है। जो भाजपा की सेहत के लिए ठीक नही है। चुनाव मैदान में उतरी भाजपा को अपने ही बगावती लोगो से लड़ना होगा। वोटर की पाले में जाएंगे यह अभी रहस्य ही रहेगा।

लेकिन जहां भाजपा से सभासद का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों ने सिम्बल वापस कर विरोध जताते हुए निर्दल मैदान में है। वहीं भाजपा के लिए प्रतिष्ठा बचाना मुश्किल होगा। लगभग दर्जनों वार्डो से सभासदों ने भाजपा का सिम्बल लौटा दिया है। भाजपा से बागी हुए प्रताशियों की बगावत की आंधी ने रुद्रपुर नगर की चुनावी फ़िजा ही बदल दी है।