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निकाय चुनाव रुद्रपुर: बड़े दलों के गले की फांस बनी घड़ी और छड़ी

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– बिगड़ सकता है सपा, बसपा, भाजपा और कांग्रेस का चुनावी समीकरण…
– बागियों और कार्यकर्ताओं की कमी से जूझ रहे है बड़े दल…

Priyesh Shukla

प्रियेश शुक्ला

गोरखपुर (रुद्रपुर)। जैसे जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है वैसे वैसे नगर पंचायत चुनाव के समीकरण भी बदलते जा रहे हैं। जीत का सेहरा किसके सर पर बंधेगा यह अंदाजा लगाना अभी मुश्किल सा दिख रहा है।

मतदाता भी नुक्कड़ और जुलूस की भीड़ को देखकर अभी पशोपेश में है। लेकिन दबी जुबान रुद्रपुर की जनता यह काना-फुसी करने लगी है कि अगर इस चुनावी दंगल में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की उम्मीदवार भावना सिंह और भारतीय समाज पार्टी की उम्मीदवार सुधा निगम सपा बसपा भाजपा और कांग्रेस को जोरदार टक्कर देती दिख रही है।

क्योंकि जिस घड़ी को लेकर भावना सिंह चुनावी मैदान में है सतासी स्टेट राज परिवार से ताल्लुक़ रखती है। राज परिवार का आज भी रुद्रपुर में अच्छा रसूख़ है। छोटी जाति के लोग आज भी स्टेट को अपना मानते है और परिवार से गहरा जुड़ाव है। वहीं भाजपा से बगावत कर निवर्तमान चैयरमैन छठ्ठे लाल निगम की पत्नी सुधा निगम छड़ी के सहारे चुनावी जंग में जोर आजमाइश कर रही है।

महिला सीट होने के चलते सुधा निगम को अपने पति छठ्ठे लाल का राजनीतिक मार्गदर्शन और जनसमर्थन पुरजोर मिल रहा है। कारण यह है कि छठ्ठे लाल भाजपा के सिम्बल से ही नगर अध्यक्ष बने थे। जिनका अपना लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है जो पत्नी को जिताने में इस्तेमाल कर रहे है।

भासपा से उम्मीदवार बनने के बाद सुधा निगम की स्थिति और मजबूत दिख रही है। राजभर समाज के लोग भी खुल कर छड़ी को समर्थन दे रहे है।ऐसी स्थिति में बड़े दलों का नुकसान होता दिख रहा है। क्षेत्रीय पार्टियां चुनाव में हावी होती दिख रही है। कमोबेस यही स्थिति रही तो छड़ी और घड़ी बड़े दलों का चुनावी समीकरण बिगाङ सकते है।

एनसीपी और भासपा की मजबूती बड़े दलों के लिए खतरे की घंटी बनती जा रही है। चुनावी ऊँट किस करवट बैठेगा यह बताना मुश्किल है।मगर क्षेत्रीय दलों का मजबूती से चुनाव में उभरना बड़े दलों के लिए गले की फांस से कम नही है।बड़ी पार्टियां बागी उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं की कमी से जूझ रही है।

स्थानीय कार्यकर्ता कई खेमे में बटे हुए दिख रहे है। ऐसे में बड़े दल चौतरफा घिरे हुए दिख रहे हैं। अब मतदाताओं पर निर्भर है कि यह किसको तवज्जों देते है और किस पार्टी पर अपनी आस्था जताते हुए समर्थन में वोट देते है। अब देखना यह है कि इस चुनाव में रुद्रपुर के जागरूक मतदाता राष्ट्रीय दलों को अपनी प्राथमिकता में रखते है की क्षेत्रीय पार्टियों को तवज्जों देते है।