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प्रशासनिक चूक के चलते मयखाने में तब्दील हुए चुनाव कार्यालय

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Ajit Pratap Singh

अजित प्रताप सिंह

कानपुर देहात। निकाय चुनाव के समागम में उम्मीदवार जहां पानी की तरह पैसा लूटा रहे हैं। वहीं मतदाता इसका जमकर आनंद ले रहे हैं। आलम यह है कि देर शाम होते ही चुनाव कार्यालय मयखानों में तब्दील हो जाते हैं। इसे प्रशासनिक चूक कहें या मौन सहमति देसी शराब के सरकारी ठेकों से झूम के क्वार्टर गायब हो चुके हैं।

निकाय चुनाव में भारी मात्रा में शराब खपाई जा रही है। 26 दिन के चुनावी कार्यक्रम में शराब बिक्री नया कीर्तिमान बना रही है। निकाय चुनाव में यही हाल रहा तो निष्पक्ष चुनाव कराना ही नहीं शांति व्यवस्था कायम रखना भी अपने आप में चुनौती होगा। मतदान का दिन जितना करीब आ रहा है वोटरों को रिझाने के लिए उतने ही हथकंडे आजमाएं जा रहे हैं।

चुनाव में जीतने की नहीं टांग खीचने की सियासत

चुनाव चाहे छोटा हो या बड़ा हो सियासी लोग मौका नहीं गंवाते, कानपुर देहात के तमाम नगर पंचयाते निकाय चुनाव का हाल भी कुछ ऐसा ही है। कुछ लोग व्यक्तिगत रंजिश के चलते पूंजीपति उम्मीदवार को बहलाने और बरगलाने का काम बखूबी कर रहे हैं।

उम्मीदवार विशेष को नुकसान पहुंचाने के लिए टांग खिंचाई में व्यस्त हैं। चाटुकारों ने उम्मीदवार की आंखों पर सुनहरे सपनों का ऐसा चश्मा चढ़ा रखा है कि वह जमीनी हकीकत को देखना ही नहीं चाहता।