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बुखार से डेढ़ माह में 20 लोगों की मौत, सरकारी अस्पताल में हो रहे हैं टालमटोल!

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अजित प्रताप सिंह,

कानपुर देहात। जनपद में बुखार का प्रकोप संक्रामक रूप ले चुका है। बीमारी की चपेट में आकर डेढ़ माह में 20 लोगों की मौत हो चुकी है। बीमारी नए नए गांवों में पांव पसार रही है लेकिन स्वास्थ्य महकमे की नींद अभी नहीं टूटी है।

शासन के बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे को अस्पतालों में तैनात डॉक्टर ही पलीता लगा रहे हैं। जीएसवीएम मेडिकल कालेज में परीक्षण के बाद अकारू, रूरा व भेवान में तीन डेंगू रोगी चिह्नित होने के बाद भी जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं। डॉक्टरों के न रहने से अधिकतर नवीन स्वास्थ्य केंद्रों में उपचार की कमान फार्मासिस्ट व वार्ड ब्वाय संभाल रहे हैं। बीमारी की सूचना के बाद भी स्वास्थ्य टीमें प्रभावित गांवों में नहीं पहुंच रही हैं। इससे मरीज भटकने व झोलाछाप से इलाज कराने को मजबूर हैं।

अस्पतालों की हकीकत

-रसूलाबाद ब्लॉक के पीएचसी पहाड़ीपुर में फार्मासिस्ट उपासना करती मिलीं इलाज।

-रसूलाबाद ब्लॉक के पीएचसी तिश्ती में फार्मासिस्ट शिव ¨सह व वार्ड ब्वाय रमेश देते मिले दवा।

-झींझक ब्लॉक का पीएचसी बनीपारा फार्मासिस्ट मुख्तार व वार्ड ब्वाय श्याम सुंदर के सहारे संचालित।

-डेरापुर ब्लॉक के नोनारी व बड़ा गांव स्वास्थ्य केंद्रों में अरसे से नहीं दिखे डॉक्टर।

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-अकबरपुर ब्लॉक का मड़ौली स्वास्थ्य केंद्र में 11 बजे हो जाती तालाबंदी, यदा कदा आते डॉक्टर।

-मैथा ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र औनहां में मरीज करते डाक्टर का घंटों इंतजार।

-शिवली सीएचसी में अक्सर आयुर्वेदिक चिकित्सक के सहारे रहती इमरजेंसी सेवा।

-फार्मासिस्ट शैलेंद्र अवस्थी के भरोसे चल रहा झींझक ब्लाक का कंचौसी स्वास्थ्य केंद्र।

-संदलपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अरसे से बंद है ताला।

-लैब तकनीशियन व फार्मासिस्ट संभालते उरसान पीएचसी में व्यवस्था।

-मूसानगर पीएचसी में फार्मासिस्ट विकास चन्द्र दीक्षित व लैब सहायक मो. फहीम करते इलाज।

पीएचसी रंजीतपुर में यदा कदा आते डाक्टर, कर्मियों की मर्जी से चलता अस्पताल।

सरकारी अस्पतालों पर एक नजर

जिला पुरुष अस्पताल 01
जिला महिला अस्पताल 01
सीएचसी 11
पीएचसी 06
न्यू पीएचसी 26
महिला स्वास्थ्य केंद्र 01

सभी सीएचसी व पीएचसी प्रभारियों को अस्पतालों में डाक्टरों और दवा की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। बीमारी प्रभावित गांवों में सूचना के बाद भी न जाने पर प्रभारियों से स्पष्टीकरण तलब करने के साथ ही औचक निरीक्षण में नदारद मिलने पर कार्रवाई होगी। -डॉ. सुरेंद्र कुमार रावत, सीएमओ

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