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क्या वास्तव में प्रेस लिखे वाहनों पर पुलिसिया कार्यवाई होगी?

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कानपुर पुलिस कप्तान नें प्रेस लिखे वाहनों की चेकिंग अभियान चलाने के दिए निर्देश…

Shabab Khan

शबाब ख़ान

कानपुर: नगर की कप्तान सोनिया सिंह नें एक साहसी कदम उठाया है, उन्होनें अपने मातहतों को साफ निर्देश दिया है कि एक विशेष अभियान चलाकर ‘प्रेस’ लिखे वाहनों की खासतौर से चेकिंग की जाए।

पत्रकारों के वाहनों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, इंश्योरेंस पेपर, ड्राइविंग लाईसेंस चेक किए जायें, यदि कोई अनियमिता मिले तो बिना किसी दबाव के वाहनों का चालान काट दें, गंभीर मामलों में वाहनों को सीज़ भी करनें के निर्देश महकमें को मिले हैं। हेलमेट न होने की दशा में भी कार्यवाई करनें को कहा गया है।

एसएसपी सोनिया सिंह के इस निर्देश की सूचना मिलते ही पत्रकारों की ओर से प्रतिक्रिया अानी शुरू हो गई है। ज्यादातर पत्रकार इस निर्देश को सकारात्मक रूप में लेते हुए कानपुर पुलिस कप्तान की सराहना कर रहे हैं।

वहीं कुछ पत्रकार ऐसे भी हैं जो पुलिस द्वारा पत्रकारों की गाड़ियों की चेकिंग को प्रस्तिष्ठा का सवाल मान रहे हैं। विभिन्न माध्यमों से पत्रकारों को एकता का परिचय देते हुए एसएसपी सोनिया सिंह के इस निर्देश का विरोध करनें को कहा जा रहा है। लेकिन ऐसे पत्रकारों की संख्या कम ही है।

यातायात पुलिस प्रभारी निरीक्षक दिनेश कुमार सिंह की माने तो किसी भी टू व्हीलर व फोर व्हीलर वाहन के आगे पीछे किसी भी तरह का पद नाम लिखना कानूनन अपराध है जो कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 177 का खुला उल्लंघन है उन्होंने मानवता की बात करते हुए यह भी बताया कि किसी भी व्यक्ति को अपने पद का उपयोग कानून का उल्लंघन करने में नहीं करना चाहिए।

आखिर यह क्या सूझा कप्तान साहिबा को…

दरअसल पूरे शहर में खुलेआम यातायात नियमों का उल्लंघन होता है ज्यादातर यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले प्रभावशाली लोग होते हैं जो अपने प्रभाव में यातायात नियमों का मखौल उड़ाते है। किसी राजनीतिक दल का नेता, एडवोकेट, पुलिस और दुखद बात तो यह थी कि समाज को आईना दिखाने वाले ज़्यादातर पत्रकार बंधु भी यातायात नियमों का पालन नहीं करते।

क्या वास्तव में प्रेस लिखे वाहनों पर पुलिसिया कार्यवाई होगी…

जी हॉं, यह सबसे बड़ा सवाल है कि क्या पुलिस वास्तव में अक्षरत: कप्तान के आदेश का पालन करेगी? सच कहुँ तो संभावना कम है। ट्रैफिक या सिविल पुलिस जानते हैं कि यदि आज उन्होनें किसी पत्रकार के वाहन का चालान काट दिया तो अगले दिन के समाचार पत्र के साथ-साथ सोशल मीडिया पर किसी पुलिसकर्मी की ट्रक, ट्रैक्टर से पैसे लेते हुए तस्वीर वायरल हो जाएगी।

बिना हेलमेट के ड्राइव करते हुए पुलिसकर्मी की फोटो पब्लिक देखेगी। यहॉं तक की पत्रकारों का शातिर दिमाग उनसे यूपी की डॉयल 100 के वाहनों को चलाने वाले ड्राईवर और उसके बगल में पैसेंजर सीट पर बैठे हुए पुलिसकर्मी की भी फोटो खिचवाएगा जो कभी सीट बेल्ट का उपयोग करते हुए नही देखे गये। प्रेस यह भी पूछेगा कि एडवोकेट, सिविल कोर्ट, हाई कोर्ट, डीएम ऑफिस, छात्रसंघ, फलां राजनीतिक पार्टी का नगर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष लिखे वाहनों को क्यों छूट दी जा रही है?

हॉं यदि कप्तान साहिबा नें हिम्मत दिखाते हुए हर वाहन को चेक करवाया जिसपर चाहे प्रेस लिखा हो या एडवोकेट या राजनीतिक पार्टी का नाम तो संभावना है कि घनी आबादी वाले शहर कानपुर की यातायात व्यवस्था सुधर जाए। लेकिन क्या ऐसा हो पाएगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। तब तक हम अपने पत्रकार बंधुओं से अपील करते हैं कि चाहे आपके वाहन चेक हो या न हो आ यातायात नियमों का पालन जरूर करें।

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