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पासी समाज के कद्दावर नेता आरके चौधरी सपा में शामिल, बीजेपी ने भी दिया था ऑफर

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कभी बीएसपी के मंत्री रहे आरके चौधरी नें बना ली थी ‘राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी’ नाम की अपनी पार्टी…

Shabab Khan

शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

लखनऊ: आरके चौधरी पासी समाज के बड़े नेता माने जाते हैं। वह दलित समाज को जागरूक करने के अभियान के लिए भी याद किए जाते रहे हैं। बीएसपी और सपा की पहली साझा सरकार में वह मंत्री थे। बीएसपी में मायावती के बढ़ते प्रभाव के कारण उन्होंने बीएसपी का दामन छोड़ दिया था।

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में उन्होने शुक्रवार को अपनी राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी का विलय सपा में कर दिया। इससे पहले आरके चौधरी बसपा सरकार में मंत्री थे। 2017 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने अपनी पार्टी (राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी) का भाजपा के साथ गठबंधन किया था लेकिन चुनाव हार गए थे।

यूपी विधानसभा चुनाव -2017 के दौरान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने आरके चौधरी को भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए कहा था। लेकिन वह भाजपा से गठबन्धन कर अपनी राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी से लखनऊ की सीट मोहनलाल गंज से चुनाव लड़े थे लेकिन वो हार गये थे। उनके अलावा भाजपा ने बाकी सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी। मोहनलाल गंज से सपा उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी।

आरके चौधरी ने कहा, ”समाज को नई दिशा देने वाले डॉ. राम मनोहर लोहिया और बाबा साहेब अम्बेडकर का मैं अनुयायी हूं। मैंने 1982 से ही समाज से उत्थान का काम किया।”

“हमारी ताकत को देखकर भाजपा वालों का दिमाग खराब हो गया था। तब पहली बार मुलायम स‍िंह और कांशी राम म‍िले थे। एक बार वही संगठन बनाने की जरूरत फिर है। हम सब एक हो, तभी ऐसी ताकतों को रोक सकते हैं।”

”हिन्दू हम भी हैं, सब हिन्दू हैं। न जाने कितने हिन्दू बेरोजगार हैं? कौन इनके लिए काम करेगा, क्या सिर्फ हिन्दू होने से रोजगार मिलेगा।” उन्होने कहा कि “मैं अपनी गलती मानता हूं। मुझे अखिलेश यादव ने 2012 में ज्वॉइन करने को कहा था, लेकिन अपनी गलती पर माफी मांगता हूं। अब से मेरा हर साथी सपा का जमीनी सिपाही है।”

2017 विधानसभा चुनावों के दौरान पूर्व मंत्री आरके चौधरी ने भाजपा का सर्मथन किया था। आरके चैधरी के लिए खुद गृहमंत्री राजानाथ सिंह ने उनके विधानसभा क्षेत्र मोहनलाल गंज में एक रैली और एक जनसभा को सम्बोधित किया था। इसके अलावा पीएम मोदी की रैली के दौरान भी आरके चौधरी को विशेष स्थान देते हुए उनसे मिलवाया गया था।

पूर्व सीएम मायावती से आरके चौधरी का विवाद- 2012 में बढ़ गया था उस वक्त तक आरके चौधरी बसपा से मंत्री थे। लेकिन विवाद के बाद मायावती ने उनसे किनारा कर लिया था।

बीएसपी से अलग होकर आरके चौधरी ने राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी बनाई। इसके बैनर तले उन्होंने मोहनलालगंज से दो बार विधायक बने। बीएसपी में आने के बाद उन्होंने पार्टी का विलय कर दिया था। 2014 के लोकसभा चुनाव में वह बीजेपी कैंडिडेट कौशल किशोर से हार गए थे।