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विधान परिषद में अटका UPCOCA, संशोधन प्रस्तावों के साथ अध्यक्ष नें प्रवर कमेटी को भेजा बिल

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‘न वकीन न दलील’ वाला यूपीकोका कानून व प्रेस पर अंकुश लगाने वाले अंग्रेजों के वर्नाकुलर एक्ट की तरह है: विपक्ष…

जनता में इस विधेयक का गलत संदेश दिया जा रहा है। यह अपराधियों के खिलाफ है राजनैतिक प्रतिशोध का जरिया नही: केशव प्रसाद मौर्या, उपमुख्यमंत्री…

Shabab Khan

शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

लखनऊ: गुरूवार को उत्तरप्रदेश विधानसभा में विपक्षी दलों की असहमति के बावजूद पास किया गया यूपीकोका विधेयक शुक्रवार को विधान परिषद में फंस गया। विपक्षी दलों के हंगामें के कारण सभापति ने विधेयक को प्रवर समिति को प्रेषित कर दिया।

उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध को काबू में करने के लिए योगी सरकारी का यूपीकोका बिल मुश्किलों में घिरता नजर आ रही है। योगी सरकार ने जैसे ही इस बिल को विधान परिषद में पेश किया विपक्षी पार्टियों ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामा बढ़ता देख विधान परिषद अध्यक्ष ने बिल को लेकर जांच के लिए एक कमेटी बनाने का फैसला किया।

उत्तर प्रदेश कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज़्ड क्राइम एक्ट 2017 (यूपीकोका) महाराष्ट्र नियंत्रण संगठित अपराध अधिनियम (मकोका की तर्ज पर) पर तैयार किया गया है जिस पर आज विधान परिषद में वोटिंग होनी थी। चूंकि विधानसभा में विपक्षी दल बहुमत में है इसलिए उनकी मर्जी के बिना यूपीकोका विधेयक को पास करना सरकार के हाथ में नहीं है जैसा कि विधानसभा में सरकार बहुमत में है और विपक्ष की मर्जी के बिना गुरूवार को विधेयक पास कर दिया गया था।

इसे लेकर विपक्षी दलों की असहमति को देखते हुए उम्मीद के अनुरुप विधान परिषद में यूपीकोका पास नहीं हो पाया। विपक्ष के संशोधन प्रस्तावों के साथ सभापति रमेश यादव ने बिल को प्रवर समिति को भेज दिया है। शुक्रवार को परिषद में 11 विधेयक रखे गए, इनमें से यूपीकोका व यूपी सहकारी समिति बिल पास नहीं हो सके। दोनों बिलों को संशोधन के लिए प्रवर समिति को भेज दिया गया है। सभापति रमेश यादव प्रवर समिति के सदस्यों का नाम जल्द घोषित करेंगे।

शुक्रवार की शाम को नेता सदन दिनेश शर्मा ने यूपीकोका विधेयक 2017 के विधानसभा में पारित होने की जानकारी देते हुए उसे परिषद में पास करने का प्रस्ताव किया। मगर विपक्षी सदस्य भड़क गए। सपा, बसपा एवं कांग्रेस के सदस्यों ने संयुक्त रूप से संशोधन प्रस्ताव के साथ बिल को प्रवर समिति के सुपुर्द करने की मांग की।

उल्लेखनीय है कि सदन में विपक्षी दलों का बहुमत है, जिस पर सभापति रमेश यादव ने बिल को प्रवर समिति को भेजना स्वीकार कर लिया।

यूपीकोका के संशोधन के प्रस्ताव पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि यह जनता को धोखा देने वाला कानून है। यह कानून व्यवस्था ठीक करने के लिये नहीं बल्कि राजनैतिक विरोधियों को चुप कराने के लिये लाया जा रहा है। अखिलेश ने कहा कि भाजपा सरकार कानून व्यवस्था नहीं राजनैतिक विरोधियों को ठीक करना चाहती है। कानून व्यवस्था ठीक करने के नाम पर प्रदेश की जनता को परेशान करने का हथियार बनाया जा रहा है।

बसपा विधायक दल के नेता सुनील चित्तौड़ ने यूपीकोका को काला कानून ठहराते हुए कहा कि यह दलित, अल्पसंख्यकों को उत्पीड़ित करने की मंशा से लाया गया है। इस कानून के जरिये राजनीतिक विरोधियों को सबक सिखाने की सरकार की साजिश को हम समझते हैं। बीजेपी विपक्ष विहीन राजनीति करना चाहती है। बसपा ने भी विधेयक में संशोधन प्रस्ताव का समर्थन किया।

कांग्रेस सदस्य दीपक सिंह ने इस कानून को 1919 में बने अंग्रेजों के कानून व प्रेस पर अंकुश लगाने वाले वरर्नाकुलर एक्ट से तुलना करते हुए कहा कि इसमें न वकील व न दलील की स्थिति है। लोकतंत्र में इस तरह का काला कानून थोपा नहीं जा सकता, कांग्रेस इस बिल का विरोध करती है।

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने कहा कि जनता में इस विधेयक का गलत संदेश दिया जा रहा है। यह अपराधियों के खिलाफ है राजनैतिक कार्यकर्ता के खिलाफ नहीं है। संशोधन वापस लेने की बात कहते हुए कहा कि आशंकाये निर्मूल है यह एक्ट उनकी मदद के लिये है जिनकी कोई सुनवाई नहीं करता। हमारा किसी के प्रति दुराग्रह या दुराभाव नहीं है मैं संशोधन वापस लेने की मांग करता हूं।

विधान परिषद में भाजपा अल्पमत में है जबकि सपा के पास सबसे अधिक मत है। पार्टीवार सदस्यों की संख्या इस प्रकार है:

समाजवादी पार्टी-61
बहुजन समाज पार्टी-09
भारतीय जनता पार्टी-13
कांग्रेस-02
रालोद-01
शिक्षक दल (गैरराजनीतिक)-05
निर्दल समूह-05
निर्दल व असंबद्ध-02

सपा के सदस्यों ने विधान सभा से पारित उत्तर प्रदेश सहकारी समिति (संशोधन) विधेयक 2017 पर भी संशोधन पेश किया। जिस पर सभापति ने इसे भी प्रवर समिति के सुपुर्द कर दिया। समिति एक माह के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी। इस बिल में चुने हुए प्रतिनिधियों के स्थान पर अधिकारियों के अधिकार बढ़ाए गए हैं। सहकारी समितियों की चुनावी प्रक्रिया में भी बदलाव का प्रस्ताव है।