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Rapti River Shravasti

राप्ती नदी उफान पर, गांवों के लोग दहशत में

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Mithiliesh Pathak

मिथिलेश पाठक

श्रावस्ती। सुबह से रुक-रूककर हो रही बारिश से राप्ती नदी के जलस्तर में बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। राप्ती बैराज पर शाम 4 बजे नदी खतरे के निशान से महज 15 सेमी. नीचे बह रही है।

जिससे कछार में बसे लोगों में चिंता है। क्योंकि जमुनहा इलाके के लगभग डेढ़ दर्जन गांव जो नदी किनारे बसे हैं सीधे बाढ़ के मुहाने पर हैं।

इतना ही नही मोक्षदायिनी राप्ती इस समय काल भी बनी हुई है। जो गिलौला विकासखंड के रमनगरा गांव के अस्तित्व को मिटाने पर अमादा है। गांव में बने स्कूल का नामोनिशान खत्म होने को है।

विकास खण्ड गिलौला के रमनगरा में पति का कहर साफ दिखाई पड़ रहा है जिसके आगोश में आकर सरकारी विद्यालय का अधिकांश हिस्सा पहले ही नदी की आगोश में समा चुका है, बाकी बचा कुचा भवन भी समाहित होने को बेकरार दिखाई पड़ रहा है।

विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को सरकारी मास्टर एक ग्रामीण के बने बरामदे में किसी तरह भारी अव्यवस्थाओं के बीच शिक्षा दे रहे हैं। गांव का संपर्क मार्ग भी लगभग समाप्ति के कगार में हैं। अधिकारियों ने इस गांव का दौरा भी किया परन्तु अभी तक कोई सहायता इन ग्रामीणों को नही मिल सकी है।

ग्रामीण व्याकुल निगाहों से एक टक राप्ती नदी की धारा हरपल देखते हैं, इनको राप्ती नदी का खौफ हमेशा सताता रहता है। लगातार बारिश होने के बाद से राप्ती के बढ़ते जलस्तर के कारण राप्ती नदी का जलस्तर 127.85 मीटर पहुंच चुका है। जबकि राप्ती बैराज पर खतरे का निशान 128 मीटर है।

नदी के बढ़ते जलस्तर से कछार में बसे गंगा भागड़, बेलरी, रामपुर भागड़ , कलकलवा, गजोवरी, चमारन पुरवा, भरथा, हशनापुर, बरंगा, सलारूपुरवा, बीरपुर लौकिहा, जोगिया, समसेरगढ़, लक्षमनपुर सेमरहनिया, पोदला, पोदली, काला गाँव, दुर्गा पुरवा, हरिहरपुर महराज नगर, लाहोर कला, मुन्नवर गाँव, भेला गांव आदि गांवो के लोग दहशत में हैं।

जिस गति से राप्ती के जलस्तर में बढ़ोत्तरी हो रही है उसे देखकर कहा जा सकता है की बहुत जल्द राप्ती के बाढ़ का पानी गांवो का रुख कर सकता है।

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