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और आ गई ‘अनाथ शबाना’ की ईदी!!!

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डीएम साहब नें शबाना और उसके घरवालों के लिए ईद पर नये कपड़े, मिठाईयॉं, सिवईंयॉं और नगद ईदी भी भेजी है तो हर किसी के जुबॉं पर जिलाधिकारी योगेश्वर मिश्रा की इंसानियत की प्रशंसा ही थी…

Shabab Khan

शबाब ख़ान

वाराणसी: हम पत्रकारों का इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली खबरों से कुछ इस कदर करीबी रिश्ता हो गया कि जब कभी इंसानियत की कदर करती कोई ख़बर आ जाती है तो दिल चाहता है क़लम की सारी ताकत वहीं झोंक दूँ।

जी हॉं, एेसी ही एक खबर आयी है। लिखनें बैठा तो समझ नहीं आ रहा था कि कहॉं से शुरू करुँ, कैसे भावनाओं को पिरोऊँ कि इस वाक्ये का असली मर्म है बना रहे।

बहरहाल घटना से अवगत कराता चलुँ कि बनारस के मंडुवाडीह इलाके की रहने वाली शबाना एक अनाथ बच्ची है। मॉं-बाप दोंनों दुनिया छोड़ चुके हैं। बस एक छोटा भाई और नानी हैं। आमदनी का कोई ऐसा ज़रिया नहीं कि इस महंगाईं में ईद जैसे त्योहार मनानें की जरूरतें पूरी हो सकें।

रविवार तक शबाना के घर से ईद की खुशियॉं कोसों दूर थीं। अपनें दरवाज़े पर खड़ी शबाना दूसरे बच्चों को देखती जो अपने मॉं-बाप के साथ हाथों में शॉपिंग बैंग लेकर बाजार से लौट रहे थे तो उसका दिल कुड़ता, अपने भाई को देखती तो दिल तड़प उठता, काश उसके भी मॉं-बाप होते। होते तो, इस वक्त ईद की तैयारियॉं हो रही होती। सिवाईयों की खुशबु उसके घर से भी उठती, वह भी बाजार से सबसे अच्छा सूट लेकर आती, भाई को जींस और शर्ट दिलवाती, नानी के लिए नई साड़ी लेकर आती।

रविवार की सुबह शबाना इसी उधेडबुन में बैठी थी। फिर न जानें उसके दिमाग में क्या आया कि उसनें मोबाईल उठाया और एक मैसेट टाईप करने लगी। वो मैसेज जब पूरा हुआ तो उसका मजमून कुछ ऐसा था, “सर नमस्ते, मेरा नाम शबाना है और मुझे आपकी थोड़ी सी हेल्प की जरूरत है। सर सबसे बड़ा त्यौहार ईद है। सब लोग नए कपड़े पहनेंगे लेकिन हमारे परिवार में नए कपड़े नहीं आए। मेरे माता-पिता नहीं है। 2004 में इंतकाल हो चुका है। मेरे घर में मैं और मेरी नानी और छोटा भाई है सर।” और, फिर शबाना नें उस मैसेज को एक नंबर पर भेज दिया।

शाम होने को आयी, घर में उदासी, शबाना करवटें बदलती रही। तभी अचानक उसके दरवाजे पर किसी नें दस्तक की, उदास शबाना नें जैसे ही दरवाजा खोला, सामनें का नजारा देख हड़बड़ा कर दो कदम पीछे हट गई, मुँह खुला का खुला रह गया। शबाना के दरवाजे पर पुलिस आई थी।

ज्यादातर बड़े अफसर लग रहे थें। उनके साथ और भी बहुत से पुलिस वाले थें। सामनें खड़े बड़े अफसर नें पूछा, “बेटा, आपका नाम क्या है?” बड़ी मुश्किल से उसके मुँह से अपना नाम निकला, “जी शबाना।” अफसर मुस्कुरायें और पीछे खड़े पुलिस वालों को ईशारा किया। पुलिस वालों नें बहुत से पैकेट गाड़ी से निकाले और अफसर को लाकर दिये।

अफसर एक के बाद दूसरा पैकेट शबाना को थमाते रहे और भौचक शबाना पैकेट लेती गई। वो गिन भी नही पाई की कितने पैकेट है। अफसर मुस्कुरायें और बोले, “शबाना बेटी, इसमें आपका सूट, आपके भाई के लिए जींस और शर्ट, नानी के लिए साड़ी, दूसरे पैकेट में सिवईंयॉं, और मिठाई, ड्राई फ्रूट हैं”, शबाना के मुँह से बोल ही नही फूट रहे थे। तभी अफसर नें एक लिफाफा जेब से निकाला और शबाना के हाथ में रखते हुए बोले, “और, यह रही आपकी ईदी।”

शबाना पूछना चाहती थी कि आखिर किसने उसकी मुराद पूरी कर दी। लेकिन इससे पहले कि वह कुछ पूछ पाये, अफसर नें शबाना के सर पर हाथ फेरते हुए कहा, “ईद मुबारक बेटी”… शबाना नें घिघियाते हुए कहा, “जी, आपको भी मुबारक।” अफसर मुड़े और अपनी सफेद गाड़ी में जा बैठे, आगे पीछे तीन और पुलिस वाहन स्टार्ट हुए और एक के बाद एक तेजी से चले गए।

अब आप सोच रहे होगें कि यह क्या चमत्कार हो गया। कौन अफसर था जिसके पीछे एक दर्जन पुलिस वाले भी आये थे। चलिए, राज़ खोलता हूँ। दरअसल रविवार सुबह जो मैसेज शबाना नें भेजा था वो और किसी को नही बल्कि वाराणसी के जिलाधिकारी योगेश्वर मिश्रा को भेजा था।

काशी विद्यापीठ विकासखंड के मंडुआडीह थाना अंतर्गत शिवदासपुर निवासी बिना मां-बाप की शबाना का यह मैसेज जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र के मोबाइल पर ईद से 1 दिन पूर्व रविवार को दोपहर में मिला। दिल को झकझोर देने वाले इस मैसेज को पढ़ते ही जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने शबाना को ईद की ईदी देने की मन बना लिया।

उन्होंने उप-जिलाधिकारी सदर सुशील कुमार गौड़ को तत्काल तलब किया और निर्देश दिया कि सोमवार को ईद से पहले उनकी ओर से शबाना और उसकी नानी और छोटे भाई को नए कपड़े, मिठाइयां और ईद की सेवई के लिए पैसे तत्काल पहुंचाएं।

उप जिलाधिकारी सदर सुशील कुमार गौड़ ने आनन-फानन में शबाना के लिए सलवार-सूट, उसकी नानी के लिए साड़ी एवं उसके छोटे भाई के लिए जींस का पैंट और टीशर्ट उपहार के रूप में पैक कराते हुए, मिठाइयां लेकर शबाना के घर पहुंच गए। इतने अफसरों को घर पर आया देख शबाना डर गई लेकिन जब पता चला कि उसके मैसेज को देखकर जिलाधिकारी ने उसके लिये ईदी भेजी है तो उसकी खुशी का ठिकाना ना रहा। उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि जिलाधिकारी को मोबाइल मैसेज से अपनी व्यथा सुनाने के बाद इतनी जल्दी उसकी ख्वाहिश पूरी हो जाएगीं।

इस बीच एक गरीब परिवार के घर के बाहर प्रशासनिक अमले को देखकर तमाशाबीनों की भीड़ जमा हो गई। जब उन्हें पता चला कि डीएम साहब नें शबाना और उसके घरवालों के लिए ईद पर नये कपड़े, मिठाईयॉं, सिवईंयॉं और नगद ईदी भी भेजी है तो हर किसी के जुबॉं पर जिलाधिकारी योगेश्वर मिश्रा की इंसानियत की प्रशंसा ही थी। हम भी वाराणसी डीएम के इस सराहनीय कदम के लिए उन्हें बधाई देते है।

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