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जारी है सपा की दबंगई, अतिक्रमण दस्ते को धमकाकर भगाया

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शबाब ख़ान,

वाराणसी: सपा का सूरज अस्त हुए अरसा बीत चुका है, सूबे की कमान कद्दावर नेता योगी आदित्यनाथ के हाथ में आ चुकी है। उम्मीद ही नही लगभग यकीन था कि समाजवादी पार्टी के दबंग नेता अपना बोरिया बिस्तर बॉंध कर हिमालय की किसी गुफा में जा छुपे होगें, लेकिन आज कुछ ऐसा हुआ जिससे हमारे समझ में आ गया कि दबंग और उनकी दबंगई कहीं नही गई है। भाजपा के राज में भी सपा की हनक बरकरार है।

इसकी बानगी भी देखने को मिली वो भी कहॉं? जी हॉं, अपने प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र काशी में।

मामला दरअसल आदमपुर थानाक्षेत्र का है। नगर निगम द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ चलाये जा रहे अभियान से संबधित है। तमाम लाव-लश्कर के साथ चल रहे अतिक्रमण हटाओ दस्ते का नेतृत्व सतीश चन्द्र जोनल अधिकारी, राजाराम बाल्मीकी निरीक्षक, व संजय श्रीवास्तव निरीक्षक कर रहे थे। साथ में सुरक्षा की दृष्टि से आदमपुर पुलिस के हनुमान फाटक चौकी इंचार्ज चंद्रप्रकाश कश्यप भी पर्याप्त फोर्स के साथ मौजूद थे। अभियान गोलगड्डा तिराहे से पीलीकोठी यानि ठीक आदमपुर पुलिस थाने तक तय था।

बुलडोज़र जब गोलगड्डा से चला तो अतिक्रमण का पर्यायवाची बन चुकी पहिए वाली अधिकतर गुमटियॉं पहले ही रफुचक्कर हो चुकीं थी, जो रह गयीं उनको जेसीबी ने अण्डों की तरह फोड़ दिया। आधा दर्जन पक्के चबूतरे, दो सड़क तक पैर-पसार चुके बारजे ध्वस्त कर दिए गये। लोग चुपचाप अपना तीन इंच आगे बढ़ा हुआ चबूतरों को टूटता देखते रहे, मजाल है कि कहीं से कोई चूंचाँ करता। यह है उत्तरप्रदेश में बदले हुए शासन की हनक, लेकिन साधो यह लाव लश्कर जैसे ही पीलीकोठी पहुँचा, सारी की सारी भाजपाई हनक काफूर होती नजर आयी।

अतिक्रमण दस्ता को लीड कर रहे अधिकारियों ने आदमपुर थाने के ठीक सामने पीली बिल्डिंग के आगे बढ़े हुए पक्के निर्माण को तोड़ने का जैसे ही आदेश दिया, सपा नेता व समाजवादी पार्टी महानगर उपाध्यक्ष के भाई अपने गुर्गो के साथ अतिक्रमण दस्ता पर दंबगई करने लगे, वही सुरक्षा के लिए तैनात हनुमान फाटक पुलिस चौकी प्रभारी चन्द्रप्रकाश कश्यप मूकदर्शक बने रहे।

सपा नेताओं की दंबगई के आगे अतिक्रमण दस्ते की एक ना चली और अतिक्रमण दस्ते को बैरंग वापस लौटना पड़ा। ज्ञात हो ये पीली बिल्डिंग सपा के महानगर अध्यक्ष इकबाल अंसारी के भाई की है।

पीली बिल्डिंग के मालिक व सपा नेता नगर निगम अधिकारियों पर रौब झाड़ते रहे और कहते सुने गये कि प्रदेश के बड़े से बड़े आईएएस, पीसीएस, आईपीएस अधिकारी इसी पीली बिल्डिंग में कपड़े लेने के लिए आते रहते है। इसी पीली बिल्डिंग से प्रदेश के बड़े ब्यूरोक्रैट्स, डिप्लोमैट्स का कपड़ा जाता रहता है। उनका यह कपड़ा बॉंटने वाला पासा चल गया और इससे पहले कि और मलामत हो अधिकारीगण ने वहॉं से सरकना बेहतर समझा। यह सब देख-जानकर हम तो साधो सपा के कायल हो गए कि सिर्फ अपनें कपड़े बॉंटने का वार्षिक बजट सुना कर सत्ता में न होने के बावजूद अपने सड़क तक बढ़े पैर को बचा लेना वाकई अपने आप में स्टाईलिश दबंगई है।

वहीं दूसरी ओर सपा नेताओं की दंबगई के आगे अतिक्रमण दस्ता के पसीने झूट जाने को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोगबाग चर्चा करते दिखें कि तेजतर्रार फायर ब्रांड मुख्यमंत्री योगीराज के राज में आखिर ऐसी क्या वजह थी कि अतिक्रमण दस्ते को सपा नेताओं की दंबगई के आगे झुकना पड़ा। जो भी हो साधो, इससे कौन इंकार कर सकता है कि कपड़ा सबकी जरूरत है। बाकी कल किसने देखा है, वैसे भी वापस जाते बुलडोज़र और जेसीबी के माथे पर शिकन साफ नजर आयी, क्योंकि उनको कपड़े की वाकई जरूरत नही होती, यदि वो कल लौटे तो, साधो समझ जाओ।

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