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मौत बना पानी, बिहार के बाद उत्तरप्रदेश के अवध की नदियां भी दौड़ी शहरों-गांवों की ओर

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बनारस में गंगा भी तेज़ी से बढ़ रही है आबादी की ओर, राजघाट से अस्सी समाये गंगा में…

वाराणसी ब्यूरो। पहाड़ो पर हो रही बरिश नें पिछले सात सालों का रिकार्ड तोड़ दिया। नेपाल की ओर से आने वाले पानी ने बिहार के 13 जिलों को बुरी तरह से प्रभावित किया है। कई मौतों की पुष्टि हो चुकी है। तकरीबन डेढ़ लाख लोगों को बाढ़ के पानी ने खून के आंसू रुला दिया है।

बिहार में बाढ़ पीड़ितों को यदि सबसे ज्यादा शिकायत है तो वह प्रशासन से है। बिहार के लोगों का कहना है कि किसी के बाढ़ के पानी में डूब कर मर जाने के बाद मृत शरीर की पानी में खोजबीन करके उसे निकाल कर क्रियाक्रम तक करने का काम आम लोग खुद कर रहे हैं। हालांकि बिहार में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात कर दी गई है लेकिन 13 जिलों के बाढ़ में जलमग्न होने से यह टीमें नाकाफी साबित हो रही हैं।

उधर उत्तरप्रदेश में बैराजों से छोड़े गए पानी व पहाड़ों पर हो रही बारिश से अवध क्षेत्र में बाढ़ के हालात बिगड़ते जा रहे हैं। उफनाई घाघरा, सरयू, शारदा व राप्ती का पानी कई शहरों में घुस गया है। वहीं बीते 24 घंटे में बाढ़ के पानी में पांच लोग डूब गए। इनमें से चार लोगों के शव बरामद हो गए हैं, जबकि एक की तलाश की जा रही है। उफनाई सरयू का पानी अयोध्या में घुसने से कई आश्रम डूब गए हैं।

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सीतापुर के गांजरी इलाके में बुधवार शाम घाघरा का पानी रेउसा कस्बे में घुस गया। जिससे दो मोहल्लों में घुटनों तक पानी भर गया है। थानगांव के सीपतपुर लोनियनपुरवा में नित्यक्रिया के लिए गई मैनावती (60) की बाढ़ के पानी में डूबकर मौत हो गई। बहराइच में बाढ़ के पानी में डूबने से महसी निवासी शिवकुमार (16) व खैरीघाट किशोरीलाल (45) की मौत हो गई। जबकि जरवलरोड निवासी नूरआलम (25) नहाते समय तेज बहाव में बह गया।

गोताखोर उसकी तलाश में जुटे हैं। यहां जलभराव के चलते छह मकान ढह गए। जिले में घाघरा अभी भी खतरे के निशान से 111 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। महसी में पचदेवरी गांव के निकट कटान रोकने के लिए दो साल पूर्व 16 करोड़ से बनाया गया परक्यूपाइन बांध तेज बहाव में बह गया। इसके चलते बिसवां स्पर और आसपास के नौ गांवों पर संकट आ गया है।

फैजाबाद में उफनाई सरयू का पानी रामनगरी अयोध्या में घुसने से कई आश्रम डूब गए हैं। यहां के रामघाट हाल्ट के निकट पानी पहुंच गया। फटिक शिला डूब गई है। लक्ष्मण घाट परिक्रमा मार्ग, नया घाट बंधा स्थित मधुकरिया संतों के आश्रम में भी पानी घुस गया है। फैजाबाद शहर के तटीय इलाकों में निर्मलीकुंड के कई घरों व दुकानों मेें पानी घुसने से लोग परेशान हैं। गुप्तार घाट के मंदिर तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है।

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गोंडा में घाघरा का पानी नालों के जरिये गोंडा-लखनऊ मार्ग के किनारे भरने लगा है। नकहरा गांव के पास एल्गिन-चरसड़ी बांध का हिस्सा कटकर नदी में समा गया। बाढ़ ने सात साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। करनैलगंज तहसील के 745 से अधिक मजरे चपेट में हैं। बलरामपुर में बाढ़ के चलते लोग छतों तथा ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं।

बाराबंकी में एल्निग चरसड़ी तटबंध का 50 मीटर हिस्सा घाघरा में समा जाने से हालात और बेकाबू हो गए हैं। बृहस्पतिवार को रामसनेहीघाट के मल्हानपुरवा निवासी हरिश्चंद्र (55) की डूबने से जान चली गई।

अगले चौबीस घण्टों तक पहाड़ो पर भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। यदि भारी बारिश होती है तो नेपाल से सटे बिहार और यूपी में बाढ़ की स्थिति विकराल रूप ले सकती है।

इधर बनारस में गंगा भी एक के बाद दूसरे घाटों को अपनें आंचल मे समेटती जा रही है। प्रसिद्ध शीतला मंदिर पूरी तरह पानी में समा गया है। एक से दूसरे घाट का संपर्क टुट गया है, धीरे-धीरे गंगा घाटों की सीढ़ीयों को लीलती जा रही है। राजघाट, भैंसासुर घाट, गायघाट, डा० राजेंद्र प्रसाद घाट, प्राचीन दाशाश्वामेध घाट पूरी तरह पानी में समा चुके हैं। महाशमशाम मणिकर्णिका घाट भी जलमग्न हो चुका है। यहॉं लाशों का क्रियाक्रम घाट की छत पर किया जा रहा है।

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हालांकि आसार है कि आज रात मणिकर्णिका घाट की छत भी पानी में होगी। लेकिन चूंकि इस महाशमशाम पर चिता कभी बुझती नही इसलिए ज्यादा पानी बढ़ने के बाद चिताए गलियों में जलाई जाने लगेगी। मालवीय पुल का खंभा मात्र एक से डेढ़ मीटर पानी के ऊपर है। पुल पर से गुजरने वाली ट्रेनों को कॉशन पर चलाया जा रहा है तथा पुल पर भारी वाहन प्रतिबंधित हैं।

उधर इलाहाबाद से यमुना का हाल पता किया तो जानकारी मिली की यमुना नें अपने अाप को चौड़ा करना शुरु कर दिया है, हालांकि शहर में यमुना खतरे के निशान से कई मीटर नीचे बह रही है लेकिन फिर भी देश के दूसरे भागों मे पानी द्वारा मचाई गई तबाही देखकर आम लोगो के माथे पर शिकन देखी जा सकती है।

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