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वाराणसी फ्लाईओवर मामला: चींटी की चाल चल रही है 15 मौतों की तफ्तीश

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सामूहिक लापरवाही के कारण इतने लोगों की जान गई, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई क्यो नही…?

दयानंद तिवारी

दयानंद तिवारी

 

 

 

 

 

 

वाराणसी: निर्माणाधीन चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर की दो बीम गिरने से हुई 15 मौतों से जुड़े मुकदमे की तफ्तीश गति नहीं पकड़ पा रही है। प्रदेश सरकार के स्तर से सख्त निर्देश के बावजूद पुलिस हादसे के नौ दिन बाद भी आरोपियों को गिरफ्तार करना तो दूर पुलिस उन्हें गिरफ्तार तक नहीं कर सकी है।

पुलिस की कार्रवाई महज साक्ष्य एकत्र करने तक ही सीमित है और इसे लेकर आमजन में खासा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब प्रदेश सरकार की तकनीकी समिति ने दोषियों को चिह्नित कर दिया है तो उनके खिलाफ कार्रवाई में देरी क्यों की जा रही है।

15 मई की शाम साढ़े पांच बजे के लगभग निर्माणाधीन फ्लाईओवर की दो बीम कैंट रेलवे स्टेशन के समीप एईएन कॉलोनी के सामने सड़क पर गिर गई थी। हादसे में एक बीम के नीचे दबे वाहनों में 15 लोगों की मौत हो गई थी और 11 लोग घायल हो गए थे। 16 मई को पुलिस की ओर से सिगरा थाने में सेतु निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस की कार्रवाई ठोस तरीके से नजर नहीं आई।

सिगरा थाने में दर्ज मुकदमे की विवेचना कर रही क्राइम ब्रांच फिलहाल साक्ष्य एकत्र करने और बयान दर्ज तक ही सीमित है। इसे लेकर लोगों का कहना है कि आखिर इतने गंभीर मामले की तफ्तीश और कार्रवाई में पुलिस को समय क्यों लग रहा है।

पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों पर भी हो कार्रवाई

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को जब सर्किट हाउस में ठहरे थे तो उनसे मुलाकात करने के लिए डीएलडब्ल्यू से योगिता तिवारी पहुंची। हालांकि पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने योगिता को सीएम से नहीं मिलने दिया। योगिता फ्लाईओवर हादसे से बेहद आहत हैं और उनका कहना था कि इसके लिए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी तो जिम्मेदार हैं। सामूहिक लापरवाही के कारण इतने लोगों की जान गई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने किसी तरह से योगिता को समझा बुझाकर शांत कराया और उन्हें उनके घर भेज दिया।

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