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सरकार की दावों के बावजूद भी जर्जर स्थिति है प्राथमिक पाठशालाओं की

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Saurav Saxena

सौरव सक्सेना

विदिशा। स्कूल में पढ़ाई के लिए जहां सरकार बच्चों को कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध करने और राज्य को संपूर्ण शिक्षित राज्य घोषित करने में लगी हुई है। वही सरकारी स्कूलों में हालत तो कुछ और ही बयां कर रही है। सुनने में अजीब लग रहा हो लेकिन इस ग्राम के प्राथमिक पाठशाला में केवल 9 बच्चों की उपस्थिति दर्ज है और इस स्कूल में कुल 2 शिक्षक पदस्थ है।
मामला विदिशा जिले के गंज बासोदा के ग्राम भसूडा के प्राथमिक पाठशाला का है। इस प्राथमिक पाठशाला में मात्र 11 बच्चों का नाम दर्ज है। यहां गांव के ही मात्र 9 बच्चें पढ़नें आते हैं जबकि गांव मैं 40 बच्चों की संख्या है एवं ज्यादातर बच्चे गंजबासोदा गांव के बाहर पढ़ने के लिए जा रहे है।

कारण पता करने पर ग्रामीणों ने बताया कि गांव के स्कूल में बच्चों को नीचे टाटपट्टी में बिठाकर पढ़ाया जाता है और अंदर से स्कूल की हालत भी जर्जर हो चुकी है और दरार भी पड़ रही है।

वही स्कूल में पढ़ने वाली साक्षी पंथी ने बताया कि कक्षा 1 से लेकर 5 तक किसी कक्षा में एक तो किसी कक्षा में दो तो किसी में तीन बच्चों का नाम दर्ज है एवं दो शिक्षिकाएं स्कूल को संचालित करती है। स्कूल पहुंच कर हमने भी स्कूल में आने वाले बच्चों की संख्या देखनी चाहिए तो हमें वहां पर मात्र 3 बच्चों की उपस्थिति मिली। 3 बच्चों को पढ़ाने वाली 2 शिक्षिकाएं वहां पर मौजूद थी।

वही जब हमने पदस्थ सहायक शिक्षिका भगवती अहिरवार से बात की तो उन्होंने भी माना कि गांव के ज्यादा तर बच्चे शहर पढ़ने जा रहे है। गांव में कोई पढ़ना नहीं चाहता। वही जब इस मामले को लेकर  ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ज्ञान प्रकाश भार्गव ने बताया कि ऐसी प्राथमिक शालाएं जहां पर बच्चों की संख्या कम है उन्हें सूचीबद्ध करने का कार्य किया जा रहा है।

आने वाले समय में ऐसी पाठशाला को पास के गांव में संचालित होने वाली अन्य प्राथमिक शाला के साथ मर्ज कर दिया जाएगा। लेकिन हम सरकार की अनदेखी की बात करें तो किसी प्राथमिक शाला में 9 छात्रों पर 2 शिक्षकों को नियुक्त कर शाला का संचालन कहीं से कहीं तक उचित नही। सरकार को या तो यहां पर बच्चों की संख्या को बढ़ाने के लिए सरकारी शाला मैं शैक्षणिक स्तर एवं सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर की तरफ ध्यान देना चाहिए।