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करोंड़ों की लागत से बने वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के बावजूद गंगा में गिर रही है गंदगी

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नही कर पा रहा है ट्रीटमेंट प्लांट अपनी पूरी क्षमता के साथ पानी को फिल्टर…

Aslam Ali

असलम अली

 

 

 

 

 


मिर्जापुर: सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी गंगा का जल निर्मल नहीं हो पा रहा है। इसको गंभीरता से लेते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने प्रदेश सरकार और उससे संबंधित प्राधिकरणों से गंगा को स्वच्छ बनाने संबंधी आदेश के अनुपालन में उठाए गए कदम के बारे में स्पष्ट ब्योरा मांगा है।

जिले की स्थिति पर गौर करें तो छोटे बड़े 24 से अधिक नालों का पानी गंगा में गिरता है। इस पर अंकुश लगाने के लिए कलेक्ट्रेट के पास स्थापित 14 एमएलडी क्षमता का एसटीपी कारगर साबित नहीं हो रहा है।

करोड़ों की लागत से स्थापित यह प्लांट अपनी पूरी क्षमता के साथ इस्तमाल में नही लिया जा रहा है। जिले भर में दो दर्जन से अधिक नालों का पानी गंगा में गिर रहा है।

बदली घाट के पास, नारघाट, भोरे, रुक्खड़ घाट, इमाम बाड़ा के पास गंगा में नालों का पानी गिरता है। ग्रामीण इलाकों में लोग गंगा में कपड़ों की धुलाई करते हैं। इसके अलावा घाटों के आसपास रहने वाले लोगों के घरों का गंदा पानी भी गंगा में जा रहा है।

गंगा को निर्मल बनाने के लिए कलेक्ट्रेट के पास वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया है। सीवेज के पानी को प्लांट में लाकर कचरे और पानी को अलग किया जाता है। कचरे से खाद बनाई जाती है। कुछ दिनों तक प्लांट ठीक से काम करता रहा लेकिन बाद में उदासीनता के चलते प्लांट की स्थिति दयनीय होती चली गई।

सीवर में पशुओं के मांस के लोथड़े फेंक दिए जाते हैं जो पाइपों के सहारे प्लांट में जाकर फंस जाते हैं और ट्रीटमेंट प्लांट की मशीनें काम करना बंद कर देती हैं। इससे कर्मचारियों को बार-बार मशीन से लोथड़ों को अलग करना पड़ रहा है।

लगभग 25 वर्ष पूर्व स्थापित 14 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की वर्तमान में क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। कर्मचारियों की मानें तो मौजूदा स्थिति में 22 एमएलडी का प्लांट होना चाहिए।

गंगा प्रदूषण नियंत्रण प्लांट जिला पंचायत के पास व पक्का पोखरा दोनों स्थानों में मिला कर लगभग 40 कर्मचारी कार्यरत हैं, लाखों रुपये खर्च किया जा रहा है। इसके बावजूद कर्मचारी सक्रिय नहीं रहते हैं। प्लांट पर अधिकारी स्तर का कोई व्यक्ति मौजूद नहीं रहता है जिससे कर्मचारी मनमानी करते हैं।

ट्रीटमेंट प्लांट के प्रोजेक्ट मैनेजर जीके चौधरी ने बताया कि 14 एमएलडी का प्लांट लगाया गया है जो नाकाफी है। वर्तमान में 17 से 18 एमएलडी पानी सीवर से लिया जा रहा है जिसके चलते पानी को फिल्टर करने में परेशानी हो रही है। शासन स्तर तक यह बात उठाई गई है।

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