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किसानों की खुशहाली में ही हमारी खुशहाली है – कमिश्नर डॉ.भार्गव

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ईशू केशरवानी

ईशू केशरवानी की रिपोर्ट

रीवा। कमिश्नर रीवा संभाग डॉ. अशोक कुमार भार्गव सतना के ए.के.एस. विश्वविद्यालय में 23 से 25 फरवरी तक आयोजित तीन दिवसीय किसान विज्ञान मेला 2020 में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। मेले का आयोजन मध्यप्रदेश शासन के किसान कल्याण एवं कृषि विकास तथा ए.के.एस. विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में किया जा रहा है। उक्त अवसर पर तीन दिवसीय किसान विज्ञान मेला के दूसरे दिन आयोजित कार्यक्रम में कमिश्नर डॉ. भार्गव ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में होने वाले नवाचारों, उपकरणों एवं जानकारी किसानों तक पहुंचाने में मेले की अहम भूमिका होगी। कृषि के क्षेत्र में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी यह मेला मददगार साबित होगा। कृषि हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। गांव हमारे देश की आत्मा है जहां दिन-रात मेहनत कर किसान खेती करते है। किसान हमारी सभ्यता और संस्कृति के दर्पण है। पौराणिक मान्यताओं में लिखित है कि ब्रम्हा, विष्णु, महेश तीनों मिलकर सृष्टि का संचालन करते है। आधुनिक समय में इन तीनों का समन्वित रूप हमारे किसान है। हमारी अर्थव्यवस्था वृक्ष की तरह है जिसकी जड़े हमारे किसान है। जब तक हम किसानों को मजबूत नहीं करेंगे तब तक हमारी अर्थव्यवस्था पल्लवित नहीं हो सकती है।
कमिश्नर डॉ. आशोक भार्गव ने कहा कि किसान कड़ी मेहनत कर अन्न पैदा कर हमारा भरण पोषण करते है। किसान के लिए खेत ही उसका मंदिर है। वह अपने कार्य में विषय परिस्थितियों में लगा रहता है। खेती किसान की हवनशाला होती है जिसमें वह स्वयं का ही हवन करता है। ऐसी कड़ी मेहनत करने वाले किसानों की खुशी में ही हमारी खुशी है। किसानों की उपेक्षा कतई नहीं करना चाहिए। म.प्र. शासन किसानों के कल्याण के लिए अनेक योजनाएँ क्रियान्वित कर रहा है। साहूकारों के चंगुल से निकालने के लिए राज्य शासन प्रयास कर रही है। लघु और सीमांत किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है|

कमिश्नर डॉ. भार्गव ने किसानों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि कृषि लाभ का धंधा बने। लोग खेती-किसानी को महत्व देना शुरू कर दें तो राष्ट्र का विकास होगा। वाइस चांसलर ए.के.एस. विश्वविद्यालय प्रो. डॉ. पी.के. बनिक ने अध्यक्षीय उद्बोधन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि विज्ञान और कृषि दोनों को एक साथ मिलकर बढ़ाने की जरूरत है।