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कब सुधरेंगे प्राथमिक विद्यालय के शौचालय

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अनिल पाण्डेय की रिपोर्ट-

प्रतापगढ़।  शिक्षा क्षेत्र बेलखरनाथ धाम के अन्तर्गत प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय एक तो बिजली पानी के अभाव का दंश झेल रहा है। वहीं सफाई अभियान की धज्जियां भी उड़ा रहा हैं।

ग्राम पंचायत बसीरपुर में शौचालय तो बना है साफ सफाई के नाम पर विद्यालय पर एक दिन भी कोई झांकने तक नहीं जाता। जहां कई दर्जन बच्चों को शिक्षा दी जाती है। वहीं मिड-डे-मील योजना के तहत बनने वाले भोजन पर भी इस गन्दगी का सीधा असर पड़ता है।

एक ओर जहां हर वर्ष सरकार प्राथमिक विद्यालयों की साफ-सफाई व शौचालय निर्माण के लिए लाखों रुपए खर्च करती है। वहीं दूसरी तरफ इन शौचालयों की बदहाल ज़मीनी हालत किसी से छिपी नहीं है।

जिला मुख्यालय से लगभग 12 किमी दूर बसीरपुर द्वितीय के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे बताते हैं, कि वे स्कूल में बने शौचालय का प्रयोग नहीं करते है। अपनी परेशानियां बताते हुए वो बताते है, “जब हमे स्कूल में शौच के लिए जाना होता है, तो स्कूल की पढ़ाई को छोड़कर खेतो में शौच के लिए जाते हैं। स्कूल में बने शौचालय में हर समय ताला ही लटकता दिखाई देता हैै। सर/मैडम कहती हैं कि शौचालय में कोई नहीं जाएगा वह बहुत ही गंदा है बाहर जाओ।

प्रतापगढ़ जिले में गांव बसीरपुर के प्राथमिक विद्यालय के साथ जनपद के अधिकांश प्राथमिक विद्यालयों में बने शौचालयों का भी ये ही हाल है। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में बने प्राथमिक स्कूलों में अधिकाशत: यही हाल देखने को मिलता हैै कि शौचालय तो बन गए है। लेकिन इस्तेमाल करने के लायक नहीं है, क्योंकि कही पर शौचालयों में गंदगी भरी हुई है, तो कहीं पर गंदगी न हो इसलिए शौचालयों में ताला पड़ा रहता हैै।

प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक बताते हैं, “स्कूल में शौचालय बना हुआ है पर शौचालय में पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए शौचालय को बंद ही रखते हैं।”

केन्द्र सरकार ने दो अक्टूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान शुुरू करने के बाद देश के प्रत्येक स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग से शौचालय का निर्माण कराया जाना था, जिससे उनकी पढ़ाई में कोई परेशानी न आ सके। लेकिन सरकारी स्कूल के शौचालयों की इस दशा से स्कूली छात्रों को शौचालय जाने में परेशानी हो रही हैं।

प्रतापगढ़ जिले के ही प्राथमिक विद्यालय बसीरपुर द्वितीय में सालों से शौचालय में गंदगी भरी हुई है। शौंचालय टूटा फूटा हाल मे पड़ा है जिसकी तरफ कोई देखने वाला नहीं है। विद्यालय के हेडमास्टर बताते हैं कि “विद्यालय में शौचालय की सफाई करने के लिए कोई सफाईकर्मी भी नहीं आता है, इसी कारण व्यवस्था थोड़ी खराब है। शौचालय की साफ- सफाई कराई गई थी किन्तु हकीकत इससे बिल्कुल विपरीत है यहां तो बच्चों को शौचालय का इस्तेमाल करना ही नहीं सिखाया जाता।”

स्कूलों में साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर शिक्षा अधिकारी बताते है, “स्कूलों में शौचालय की मरम्मत का कार्य कराया जा रहा है। 98 फीसदी तक स्कूलों में शौचालय निर्माण कार्य सम्पन्न हो चुका है। बच्चों को शौचालय में ही शौच के लिए जाने के लिए जागरूक कराना वहां के अध्यापकों का काम है।

किंतु यहां के बच्चे तो शौचालय का उपयोग ही नहीं कर सकते क्योंकि शौचालय मैं गंदगी का अंबार रहता है संबंधित विभाग एवं सरकार के लागत से बने शौचालयों का रखरखाव ही नहीं किया जाता तो ऐसे में स्वच्छ भारत मिशन का सपना देखना मानो अमावस्या की रात में चांद देखने के बराबर है।